लखनऊ। टीबी से पीडि़त मरीज एक बार खांसता और छींकता है, तो करीब 3.5 हजार बैक्टीरिया हवा में फैलते है। जिन लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें टीबी की बीमारी लग जाती है। इसमें एचआईवी और मधुमेह रोगियों में टीबी का खतरा ज्यादा रहता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डा. सूर्यकांत ने क्षय रोग पर आयोजित कार्यशाला में दी। कार्यशाला में क्षय रोग के निदान व जागरूकता पर विशेषज्ञ डाक्टरों ने चर्चा की।
उन्होंने कहा कि कुपोषण के शिकार लोगों पर टीबी का हमला तेज होता है। झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाके में रहने वाले लोगों तक सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुंचती और कुपोषण भी होता है। इस वजह से इन इलाकों में टीबी के मरीज ज्यादा मिलते हैं। उन्होंने बताया कि टीबी की बीमारी होने पर तत्काल सरकारी और निजी अस्पतालों में पंजीयन कराना चाहिए। इससे प्रति महीना 500 रुपये हासिल किया जा सकता है। टीबी की दवाएं और जांचें सरकारी अस्पताल में निशुल्क की जाती हैं। प्रदेश टीबी अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में 433661 मरीज पंजीकृत हैं। करीब एक लाख की आबादी पर दस केस सामने आते हैं। सभी टीबी मरीजों को पंजीकृत करने की चुनौती है। इस दौरान उन्होंने विभाग की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न अभियान की जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. श्रीश भटनागर सहित अन्य विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद थे।
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