लखनऊ। तमाम दावों के बावजूद कानूनी गर्भसमापन के नियमों तथा इससे जुडी सामाजिक भ्रांतियों के कारण काफी संख्या में महिलाओं को सटीक जानकारी नहीं मिल पाती है। इससे उन्हेंन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए जागरूक होने के अलावा नियमों को सही तरीके से लागू कराना होगा। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. नीलम ने कहा कि ज्यादातर महिलाओं व युवतियों को नियमों की जानकारी व दवाओं का सेवन करके नियमों की जानकारी न होने के कारण दिक्कतों का सामना करना प्रमुखता से करना पड़ता है।
डा. नीलम ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के तहत जानकारी को स्पष्ट करने के साथ सरकारी स्तर पर मौजूद डाक्टरों को व्यवहार कुशल भी बनना होगा। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक वर्ष में होने वाले 31 लाख गर्भसमापन में से 89 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर होते हैं तथा गर्भसमापन अप्रशिक्षित सेवा प्रदाता द्वारा किये जातें हैं। असुरक्षित गर्भसमापन मातृ मृत्यु का एक मुख्य कारण है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस विषय की चर्चा हर स्तर पर की जाए तथा समस्या का हल निकाला जाए।
इस विषय पर कार्य करने के लिए ेबिहार तथा प्रदेश की 20 स्वयंसेवी संस्थाओं ने साँझा प्रयास नाम का एक नेटवर्क बनाया गया है। सुरक्षित गर्भसमापन विषय पर जागरूक करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए उनकी भागीदारी सुनिश्चित कराना है। कार्यक्रम में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से डॉ मोना आसवानी ने कहा सुरक्षित व कानूनी गर्भसमापन के सम्बन्ध में सही जानकारी न होना एक बड़ी समस्या है तथा प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है।
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