PGI : प्रीटर्म शिशु के हार्ट डिफेक्ट का ट्रांसकैथेटर डिवाइस क्लोजर से इलाज सफल

0
88

नवजात एवं हृदय देखभाल में महत्वपूर्ण उपलब्धि

लखनऊ । Pgi के चिकित्सकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 34 सप्ताह में जन्मे एक अत्यंत नाजुक एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का सफल उपचार किया है। यह सफलता एक उन्नत एवं न्यूनतम चीरा लगाने वाली हृदय प्रक्रिया (ट्रांसकैथेटर डिवाइस क्लोजर) के माध्यम से संभव हुई। यह शिशु एक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था से जन्मा था, जिसमें माँ को पूर्व में 13 गर्भ हानि हो चुकी थीं, जिससे यह गर्भावस्था अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील थी। गर्भावस्था की निगरानी डॉ. संगीता एवं प्रो. मंदाकिनी प्रधान द्वारा सावधानीपूर्वक की गई। गर्भावस्था के दौरान जाँच में शिशु में गंभीर फीटल ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन पाया गया, जो प्लेसेंटा के अपर्याप्त कार्य के कारण होता है।

जन्म के तुरंत बाद शिशु को सांस लेने में गंभीर कष्ट हुआ और उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कर सर्फैक्टेंट थेरेपी एवं वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। स्थिति और जटिल हो गई जब शिशु में पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) पाया गया। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें जन्म के बाद बंद हो जाने वाली रक्त वाहिका खुली रह जाती है। यह वाहिका Aorta (महाधमनी) और Pulmonary artery (फुफ्फुसीय धमनी) को जोड़ती है, जिससे रक्त का प्रवाह असामान्य हो जाता है, फेफड़ों पर अतिरिक्त भार पड़ता है और? हृदय पर दबाव बढ़ता है।

प्रारंभिक उपचार के रूप में Paracetamol एवं Ibuprofen जैसी दवाओं का उपयोग किया गया, जो सामान्यतः PDA को बंद करने में सहायक होती हैं। किन्तु इस शिशु में दवाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिला और शिशु को लंबे समय तक श्वसन सहायता पर निर्भर रहना पड़ा। लगभग 45वें दिन, शिशु की स्थिति को स्थिर करने के बाद, ट्रांसकैथेटर PDA डिवाइस क्लोजर की प्रक्रिया की गई। यह एक उन्नत एवं तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, विशेषकर इतने छोटे और नाजुक प्रीटर्म शिशुओं में। इस प्रक्रिया में एक छोटे उपकरण को कैथेटर के माध्यम से शरीर के भीतर डालकर असामान्य रक्त वाहिका को बिना ओपन सर्जरी के बंद किया जाता है।

प्रक्रिया के बाद शिशु की स्थिति में निरंतर सुधार देखा गया। धीरे-धीरे श्वसन सहायता हटाई गई, जीवन रक्षक संकेत स्थिर हुए तथा शिशु ने अच्छी तरह दूध पीना और वजन बढ़ाना शुरू किया। शिशु को जीवन के 76वें दिन स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस सफलता में हृदय रोग विभाग की टीम का नेतृत्व डॉ. अंकित साहू एवं प्रो. आदित्य कपूर ने किया, साथ में सीनियर रेजिडेंट डॉ. बिभास रहे। नवजात विभाग की क्लिनिकल टीम में डॉ. फौजिया फरहत, डॉ. अभिषेक पॉल, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. आकांक्षा वर्मा, डॉ. आरोही गुप्ता, डॉ. आर. के. श्वेताभ तथा सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकिता एवं डॉ. अन्बारसन शामिल रहे, जो विभागाध्यक्ष डॉ. कीर्ति एम. नरांजे (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नवजात विभाग) के निर्देशन में कार्यरत थे। संस्थान के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने सभी टीमों को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी।

Previous articleसंगठनों की चुप्पी पर भारी पड़ा एक पत्रकार, पेंशन की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here