8 साल के बच्चे को मिला नया जीवन
Pgi के डॉक्टरों की बड़ी कामयाबी—दुर्लभ जेनेटिक बीमारी ALPS से जूझ रहे बच्चे का जटिल प्रत्यारोपण सफल


लखनऊ। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के डॉक्टरों ने उत्तर प्रदेश में पहली बार हैप्लोआइडेंटिकल हेमेटोपोएटिक सेल ट्रांसप्लांट (हाफ-मैच स्टेम सेल ट्रांसप्लांट) सफलतापूर्वक किया
इस जटिल प्रक्रिया से 8 साल के बच्चे को नई जिंदगी मिली
बच्चे को दुर्लभ जेनेटिक बीमारी ऑटोइम्यून लिम्फोप्रोलिफेरेटिव सिंड्रोम (ALPS) थी
बीमारी कैसे हुई और लक्षण क्या थे?
4 साल की उम्र से ही बच्चे को:
बार-बार मुंह में छाले, गंभीर खुजलीदार घाव, शरीर में लिम्फ नोड्स (गांठें), लिवर और तिल्ली का बढ़ना, खून की कमी (एनीमिया), बीमारी धीरे-धीरे गंभीर होती गई और संक्रमण का खतरा बढ़ता गया।
🧪 क्या है ALPS बीमारी?
यह एक दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर है। FAS जीन म्यूटेशन के कारण होता है। इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम खुद के खिलाफ काम करने लगती है।
इसके कारण:
रक्त कोशिकाओं में कमी, बार-बार संक्रमण, प्लेटलेट्स की कमी से ब्लीडिंग ,आगे चलकर लिम्फोमा (कैंसर) का खतरा
🏥 कैसे हुआ इलाज?
मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के HOD डॉ. कौशिक मंडल की टीम ने इलाज किया। डॉक्टरों ने हैप्लोआइडेंटिकल (50% मैच) स्टेम सेल ट्रांसप्लांट का फैसला लिया।
बच्चे के पिता बने डोनर
⚠️ कितना था रिस्क?
अगर शरीर डोनर के स्टेम सेल को स्वीकार नहीं करता:
हल्का संक्रमण भी जानलेवा हो सकता था । यह ट्रांसप्लांट अत्यंत जटिल और हाई-रिस्क माना जाता है। 💰 इलाज का खर्च
कुल खर्च: ₹10–15 लाख
पूरा खर्च स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उठाया।
⭐ क्यों है यह उपलब्धि खास?
यूपी में पहली बार इस तरह का हाफ-मैच स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सफल, ऐसे मरीजों के लिए उम्मीद, जिन्हें पूरा मैच डोनर नहीं मिलता.












