स्वास्थ्य संवर्धन, स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोग निवारण में उत्कृष्ट है प्राकृतिक चिकित्सा

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1879

 

 

 

 

लखनऊ । प्राकृतिक चिकित्सा व्यक्ति को उसके शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक तलों पर प्रकृति के रचनात्मक सिद्धांतों के अनुकूल निर्मित करने की एक नैसर्गिक चिकित्सा पद्धति है, प्राकृतिक चिकित्सा में स्वास्थ्य संवर्धन, स्वास्थ्य संरक्षण, रोगों से बचाव एवं रोग प्रबंधन की अद्भुत क्षमता है यह ठोस सिद्धांतों पर आधारित एक औषधि रहित रोग निवारक चिकित्सा पद्धति है, प्राकृतिक चिकित्सा एक अति प्राचीन चिकित्सा विधा है, जो कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है।

 

 

 

वेदों एवं अन्य प्राचीन ग्रंथों में हमें इसके अनेक संदर्भ मिलते हैं विजातीय पदार्थ का सिद्धांत जीवनी शक्ति संबंधी अवधारणा प्राकृतिक चिकित्सा को आधार प्रदान करती है, जो कि प्राचीन ग्रंथों में पहले से ही उपलब्ध है।
प्राकृतिक चिकित्सा प्रत्येक रोग के अलग कारण तथा उसके विशिष्ट चिकित्सा में विश्वास नहीं रखती, अपितु प्राकृतिक रहन-सहन, सोने-जागने, कार्य करने व विचार तथा यौन संबंधी आचरण में विषमता तथा पंच महाभूत तत्वों के असंतुलन आदि कारण ही रोगों के मुख्य कारण के रूप में स्वीकार करती है।
प्राकृतिक चिकित्सा का कार्य उचित चिकित्सा प्रक्रियाओं के प्रयोग द्वारा प्रकृति के रोग निवारण कार्य में सहायता पहुंचाना तथा नैसर्गिक शक्तियों को सुरक्षित सेमाओं में कार्यरत रखना होता है। भारत में प्राकृतिक चिकित्सा के पुनरुत्थान की शुरुआत जर्मनी के लूईकूने की पुस्तक न्यू साइंस ऑफ़ हीलिंग एवं एडोल्फ जुस्ट की रिटर्न टू नेचर नामक पुस्तक का अनुवाद हिंदी, तेलुगू , उर्दू आदि भाषाओं में होने के पश्चात प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार को काफी बढ़ावा मिला। एडोल्फ जुस्ट की पुस्तक ‘रिटर्न टू नेचर’ से प्रभावित होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी प्राकृतिक चिकित्सा के प्रबल समर्थक बन गए गांधी जी ने ना केवल अपने *पत्र हरिजन में प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थन में अनेक लेख लिखे बल्कि अपने ऊपर,अपने परिवार के सदस्यों, व आश्रम वासियों पर प्राकृतिक चिकित्सा के अनेकों प्रयोग भी किए। महात्मा गांधी पुणे स्थित डॉ. दिनसा मेहता के नेचर क्योर किलनिक में सन 1934 से 1944 के मध्य प्राकृतिक चिकित्सा के लिए आया करते थे, उनकी स्मृति को चिरस्थाई करने के लिए भारत सरकार ने उस स्थान पर *राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान* बापू भवन ताड़ीवाला, रोड पुणे की स्थापना सन् 18 86 में की, जिससे कि पुणे शहरवासियों एवं आसपास के लोगों को बेहतर प्राकृतिक चिकित्सा की सुविधाएं मिल पा रही हैं, गांधी जी ने प्राकृतिक चिकित्सा को अपने रचनात्मक कार्यों में स्थान दिया, गांधीजी के प्रभाव के कारण अनेक राष्ट्रीय नेता प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा स्वास्थ्य आंदोलन में जुड़ते गए उनमें भूतपूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, गुजरात के पूर्व राज्यपाल श्रीमन्नारायण, भूतपूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरी, आचार्य विनोबा भावे तथा श्री बालकोवा भावे के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
भारत में प्राकृतिक चिकित्सा आंदोलन मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बंगाल, महाराष्ट्र, और गुजरात आदि प्रांतों में शुरू हुआ, उस समय जिन प्राकृतिक चिकित्सकों ने विभिन्न प्रांतों में प्राकृतिक चिकित्सा के पुनरुत्थान की नींव डाली उसमें डॉक्टर महावीर प्रसाद पोद्दार, डॉक्टर जानकी शरण वर्मा, डॉक्टर खुशीराम दिलकश, डा. एस.जे. सिंह, डा. हीरा लाल, डॉक्टर विट्ठलदास मोदी, डा. कुलरंजन मुखर्जी, डा. सुखरामदास, डॉक्टर जे.एम. जस्सावाला, डॉक्टर वी. वेंकट राव, डा. गंगा प्रसाद नाहर, डा धर्मसंधि सरावगी, आचार्य के. लक्ष्मण शर्मा, आदि का नाम उल्लेखनीय है।
वर्तमान में प्राकृतिक चिकित्सा स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति के रूप में सर्वमान्य है तथा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से संबद्ध भारत में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के लगभग 50 डिग्री मेडिकल कॉलेज 5 वर्ष 6 माह बी. एन.वाई. एस. पाठ्यक्रम एवं योग व नेचुरोपैथी में 3 वर्षीय MD पाठ्यक्रम संचालित है। वर्तमान में हजारों की संख्या में प्रतिवर्ष योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के चिकित्सक अध्ययन पश्चात देश विदेशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।भारत में सैकड़ों प्राकृतिक चिकित्सालय बड़े स्तर पर कार्य कर रहे हैं जिनमें *महात्मा गांधी द्वारा स्थापित प्राकृतिक चिकित्सालय निसर्गोपचार केंद्र उरुली कांचन पुणे,
आरोग्य मंदिर गोरखपुर, पतंजलि योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय योग ग्राम हरिद्वार, *वैदिक योग- प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान इंदिरा नगर लखनऊ, बालाजी निरोगधाम करनाल रोड दिल्ली, नेशनल इंस्टीट्यूट आफ नेचरोपैथी पुणे, देव अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र कानपुर यू.पी., जिंदल नेचर केयर हॉस्पिटल बेंगलुरु, एस. व्यासा नेचुरोपैथी हॉस्पिटल एवं विश्वविद्यालय बेंगलुरु, प्राकृतिक चिकित्सालय पट्टी कल्याणा पानीपत हरियाणा, हरियाणा प्राकृतिक चिकित्सालय भिवानी हरियाणा, नवनीत प्राकृतिक चिकित्सालय बस्सी जयपुर, बापू नेचर क्योर हॉस्पिटल जयपुर आदि महत्वपूर्ण प्राकृतिक चिकित्सालय भारत में संचालित हैं।
विगत वर्षो में हुएअनुसंधानों से ज्ञात होता है कि निम्नलिखित रोगों के प्रबंधन में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति विशेष प्रभाव कारी सिद्ध हुई है —– पुरानी कब्ज, गैस, एसीडिटी, फैटी लीवर, लिवर सिरोसिस, स्प्लीन वृद्धि, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, अनिद्रा, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, लंबर स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क,अर्थराइटिस, जोड़ों के दर्द ,सी.ओ.पी.डी.,साइनोसाइटिस, नेजल पॉलिप, वायरल इनफेक्शन, फेफड़े की कमजोरी, एनीमिया, निमोनिया, माइग्रेन, कमजोर स्मरण शक्ति, मानसिक रोग चिंता,भय, तनाव, निराशा, अवसाद, स्त्री रोग ल्यूकोरिया, मासिक धर्म की अनियमितता, सेक्सुअल वीकनेस, आदि रोगों का प्रबंधन प्राकृतिक चिकित्सा में हुआ सम्भव।

*राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस 18 नवंबर* पर विशेष *आलेख प्रस्तुति—-
*स्वास्थ्य संवर्धन, स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोग निवारण में उत्कृष्ट है प्राकृतिक चिकित्सा
*डा. एन. एल. जिज्ञासु*
वरिष्ठ प्राकृतिक चिकित्सक* *वैदिक योग-प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान*
इंदिरा नगर, लखनऊ

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