लखनऊ। कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी अगर तबियत खराब होने पर जांच रिपोर्ट पाजिटिव आती है तो तीन माह तक दोबारा जांच कराने की जरूरत नहीं है। ठीक होने के बाद जांच कराने पर आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है, लेकिन यह जांच रिपोर्ट क्लीनिकल फाल्स पॉजिटिव मानी जाती है। इसकी क्लीनिकल यह है कि यदि शरीर में वायरस का मृत आरएनए पड़ा है, तो भी आरटीपीसीआर की जांच में वह पॉजिटिव ही आता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर जारी गाइडलाइन के अनुसार तीन माह तक दोबारा जांच की जरूरत नहीं बतायी गयी है।
केजीएमयू ट्रांसफ्जून मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. तूलिका चंद्रा कहना है कि बिना लक्षण वाले मरीजों को तीन दिन तक बुखार नहीं आने पर 10वें दिन बिना जांच के डिस्चार्ज करने और 14 दिन तक होम आइसोलेशन में रहने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहना है कि इस गाइडलाइन के अनुसार 24 दिन का समय पूरा कर लेने वालों से किसी दूसरे में संक्रमण का खतरा नहीं पाया जाता है। वही पीजीआई के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डा. अनुपम वर्मा का कहना हैं कि अभी तक विश्व में सिर्फ एक मरीज में दोबारा संक्रमण की पुष्टि का रिकार्ड है। मरीज को दोबारा संक्रमण चार महीने के बाद हुआ था। हांगकांग का एक मरीज दूसरे देश पहुंचा था, जहां जांच के दौरान पॉजिटिव पाया गया, लेकिन वह वायरस हॉगकांग के वायरस के नेचर से अलग था। इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही करायी गयी दोबारा जांच में गाइड लाइन के अनुसार कोई आवश्यक नहीं है। अगर पाजिटिव आता है तो पहले करायी गयी निगेटिव जांच के बाद लक्षण भी मिलान करना चाहिए












