लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का नर्सिंग स्टाफ मरीजों को इलाज देने के साथ ही पीडि़त तीमारदारों को न्याय दिलाने के लिए समय पर क्लीनिकल सबूत एकत्र करने में मदद करेंगी। यहीं नही पीड़ितों के क्लीनिकल सबूत को कैसे सुरक्षित रखा जाए आैर समय पर कहां से नमूने एकत्र किए जाएं। इसके लिए नर्सिंग स्टाफ को उच्चस्तरीय फॉरेंसिक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पीड़ित मरीज का इलाज के साथ दर्द भी बांट कर न्याय दिलाया जा सकेगा।
यह जानकारी केजीएमयू डेंटल यूनिट में फॉरेंसिक ऑडोंटोलॉजी विभाग की वरिष्ठ डॉ. शालिनी गुप्ता ने दिया। सोमवार को केजीएमयू में फॉरेंसिक नर्सिंग विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके तहत नर्सों के फॉरेंसिक ट्रेंनिग पर ऑनलाइन चर्चा की गयी।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि फॉरेंसिक प्रशिक्षण के दौरान नर्सों को बलात्कार, चाइल्ड उत्पीड़न, पीड़ित की मृत्यु आदि के केस में पीड़ितों के इलाज के दौरान सुबूत जुटाने के लिए क्लीनिकल प्रशिक्षण देकर बारीकी सिखायी जाएगी।
इसके साथ ही इलाज के दौरान कहां पर कितनी आैर कैसी सावधानी बरतनी चाहिए। इसकी भी क्लीनिकल जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केजीएमयू ने नर्सिंग के पाठ्यक्रम में भी फॉरेंसिक साइंस को जोड़ा गया है।
कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि किसी भी घटना के पीछे मौके पर सबूत होने के अलावा मरीज के पास भी क्लीनिकल एवीडेंस होते है, जो कि सही समय पर सही तरीके से एकत्र करना होता है। यह क्लीनिकल एवीडेंस पीड़ित को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस तरह के पीड़ित जब अस्पताल आता है तो सबसे पहले इलाज व मदद के लिए नर्स से ही सामना होता है। इलाज के दौरान जरा सी असावधानी से मौजूद सबूत समाप्त हो सकते है। ऐसे में सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर इलाज दिया जाना चाहिए। इस उच्चस्तरीय फॉरेंसिक तकनीक के साथ नर्सों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में पैरामेडिकल सांइस के डीन डॉ. विनोद जैन ने कहा कि फॉरेसिंक के प्रशिक्षण से नर्स नये आयाम स्थापित करने के साथ उन्हें जॉब के नए अवसर उपलब्ध होंगे।












