लखनऊ। King George’s Medical University में लिफ्टों की खराब व्यवस्था मरीजों और तीमारदारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। विश्वविद्यालय परिसर में लगी कई लिफ्टें आए दिन खराब हो रही हैं और लोगों के फंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि लिफ्टों के रखरखाव पर हर साल करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी चुप है।
केजीएमयू परिसर में कुल 170 लिफ्टें संचालित हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक लिफ्ट के रखरखाव पर सालाना करीब सवा लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद कई लिफ्टें कंडम हालत में हैं। मरीजों और कर्मचारियों का आरोप है कि मरम्मत का काम केवल कागजों तक सीमित है और जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदारों की मिलीभगत से बजट का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।
हाल ही में टीजी हॉस्टल में एक दंपति करीब एक घंटे तक लिफ्ट में फंसा रहा। बंद लिफ्ट में घुटन बढ़ने से दोनों की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका। पीड़ितों ने मामले की शिकायत भी दर्ज कराई है।
इसी महीने शताब्दी फेज-2 भवन में डॉक्टरों और कर्मचारियों से भरी एक लिफ्ट अचानक बंद हो गई। करीब दस मिनट तक लोग अंदर फंसे रहे। आरोप है कि आपात स्थिति में अलार्म सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था। कर्मचारियों ने मोबाइल फोन से परिचितों को सूचना देकर ऑपरेटर बुलाया, तब जाकर लिफ्ट खोली जा सकी। इसी भवन में मरीजों की लिफ्ट में दो तीमारदार करीब आधे घंटे तक फंसे रहे।
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने केजीएमयू प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर लिफ्टों की ऐसी स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।











