लखनऊ। King George’s Medical University के लॉरी कार्डियोलॉजी विभाग में इलाज के लिए पहुंचे एक हृदय रोगी की मौत के बाद मंगलवार को हंगामे की स्थिति बन गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मरीज के शरीर में लगाया गया आईसीडी (इंट्रा कार्डियक डिवाइस) समय से पहले खराब हो गया, जिसकी वजह से जान चली गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
दुबग्गा निवासी आशीष साहू (36) लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे। परिवार के मुताबिक, सितंबर 2025 में लॉरी कार्डियोलॉजी विभाग में उनके शरीर में आईसीडी डिवाइस लगाई गई थी। डॉक्टरों ने उस समय मशीन के लंबे समय तक सही ढंग से काम करने का भरोसा दिया था। परिजनों का आरोप है कि करीब नौ महीने के भीतर ही मशीन ने काम करना बंद कर दिया।
मृतक के भाई मुकुल साहू ने बताया कि शनिवार को जांच के दौरान डॉक्टरों ने आईसीडी खराब होने की जानकारी दी थी। नई मशीन लगाने के लिए करीब आठ लाख रुपये का खर्च बताया गया। इससे पहले पुरानी मशीन लगाने में लगभग साढ़े पांच लाख रुपये खर्च हुए थे, जिसमें मुख्यमंत्री सहायता कोष से 2.75 लाख रुपये की मदद मिली थी।
परिवार का कहना है कि मंगलवार सुबह आशीष को अचानक तेज सीने में दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि समय रहते सही इलाज और मशीन की निगरानी होती तो मरीज की जान बच सकती थी। उन्होंने बताया कि इलाज का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपनी खेती का हिस्सा तक बेचना पड़ा।
मृतक अपने पीछे पत्नी किरन साहू और एक बेटे को छोड़ गए हैं। वहीं, केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।









