बच्चों, बुजुर्ग व बीमार लोगों को जल्द हो सकता है स्वाइन फ्लू

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लखनऊ। ऐसे लोग जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है जैसे बच्चे, वृद्ध, मधुमेह या एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति, दमा और ब्राोंकाइटिस के मरीज, नशा करने वाले व्यक्ति को कुपोषण, एनीमिया या अन्य बीमारियों से प्रभावित लोग, गर्भवती महिलाएं स्वाइन फ्लू की चपेट में जल्दी आते हैं। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख तथा विशेषज्ञ डॉ. सूर्यकांत ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय स्वाइन फ्लू संवेदीकरण आयोजित कार्यशाला में कही। कार्यशाला का उद्घाटन निदेशक संचारी रोग डा मिथिलेश चतुर्वेदी ने किया।
कार्यशाला में प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि स्वाइन लू का संक्रमण व्यक्ति को स्वाइन लू के रोगी के संपर्क में आने पर होता है।

इस रोग से प्रभावित व्यक्ति को स्पर्श करने जैसे हाथ मिलाना, उसके छींकने, खांसने या पीड़ित व्यक्ति की वस्तुओं के संपर्क में आने से स्वाइन लू से कोई व्यक्ति ग्रसित होता है। खांसने, छींकने, निकट से बातचीत करते समय रोगी से स्वाइन लू के वायरस दूसरे व्यक्ति के श्वसन तंत्र नाक, कान व मुहं में प्रवेश कर जाते हैं। वहीं कई लोगों में वह संक्रमण बीमारी का रूप नहीं ले पाता या कई बार सर्दी जुकाम और गले में खराश तक ही सीमित रहता है। ऐसे लोग जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है जैसे बच्चे, वृद्ध, मधुमेह या एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति, दमा और ब्राोंकाइटिस के मरीज, नशा करने वाले व्यक्ति को कुपोषण, एनीमिया या अन्य बीमारियों से प्रभावित लोग, गर्भवती महिलाएं इस संक्रमण की चपेट में जल्दी आते हैं।

डॉ सूर्यकांत ने बताया कि हमारी संस्कृति में दादी नानी सभी को बताती थी कि बाहर से आने पर पहले हाथ पैर और मुंह धोकर ही रसोई घर में प्रवेश करने देती थी।यह अब सबको बताते है कि खाने के पहले हाथ पैर धुल किया करें। डा. मिथिलेश चतुर्वेदी ने कहा कि डाक्टरों को सर्दी, जुकाम व बुखार के सभी मरीजों को जांच के लिए नहीं भेजना चाहिए। केवल कैटेगरी सी के रोगियों को ही जांच के लिए भेजा जाना चाहिए। सीएमओ डा. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि स्वाइन लू से घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी रोकथाम के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में स्वाइन लू की दवा तथा मास्क सीएमओ कार्यालय में मौजूद हैं। कार्यक्रम में केजीएमयू की बालरोग विशेषज्ञ डा शालिनी त्रिपाठी तथा नोडल अधिकारी वेक्टरबार्न डा केपी त्रिपाठी से सहायता ली जा सकती है।

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