शनि जयन्ती 16 मई को, इस दिन करें यह कार्य मिलेगा आर्शीवाद

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लखनऊ। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। इस बार शनि जयन्ती 16 मई को है। इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था इस दिन व्रत रखकर सायंकाल में शनि पूजन और शनि की वस्तुओं के दान और शनि के मंत्र के जाप से शनि प्रसन्न होते है।

 

 

 

 

 

 

स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र के   ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल  ने बताया कि  ज्येष्ठ अमावस्या या दर्श अमावस्या का विशेष महत्व है और यह शुभ तिथि पितरों को तर्पण, पितृ दोष निवारण, पितरों के नाम का दान और भोज के लिए उत्तम माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों के नाम का तर्पण करने से शांति मिलती है और परिवार पर आशीर्वाद बना रहता है. इस दिन गाय, कौवे, कुत्ते को भोजन कराने और निर्धनों को दान देने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है शनि सौर मण्डल में पृथ्वी से सबसे दूर और धीमी गति का ग्रह है। शनि पश्चिम दिशा का स्वामी और इसे ज्योतिष में न्यायधीश और सूर्य पुत्र कहा गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शनि प्रत्येक प्राणी को उसके कर्माे के अनुसार दण्ड देते है। वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती कुंभ, मीन और मेष राशि पर चल रही है सिंह और धनु पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है या जिन व्यक्तियों की कुडंली में शनि अशुभ स्थिति में हो या पीड़ित हो, शनि की महादशा या अन्तर दशा चल रही हो तो उन्हें शनि को प्रसन्न करने के लिये पीपल के वृक्ष की पूजा,पीपल के नीचे सरसो के तेल का दिया जलाना चाहिए दीन-दुःखियों, गरीबों और मजदूरों की सेवा और सहायता, काली गाय, काला कुत्ता , कौवे की सेवा करने से, सरसों का तेल , कच्चा कोयला, लोहे के बर्तन, काला वस्त्र, काला छाता, काले तिल, काली उड़द आदि के दान करने से शनि शुभफल देते है। भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना से भी शनि कष्ट नहीं देते है पीपल और शमी वृक्ष की पूजा, सात मुखी रुद्राक्ष पहनने से शनि दोष कम होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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