KGMU दवा घोटाला: बर्खास्त कर्मचारियों की अलमारियों से फिर मिलीं लाखों की दवाएं

0
36

असाध्य योजना’ के बजट में बड़ी सेंध

​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में हुए करोड़ों रुपये के दवा घोटाले की जांच अब बेहद आक्रामक मोड़ पर आ चुकी है। सोमवार को जांच समिति की मौजूदगी में विभाग के बर्खास्त कर्मचारियों की तीन और अलमारियों के ताले तोड़े गए, जिसमें से करीब 3 लाख रुपये मूल्य की सरकारी दवाएं बरामद हुई हैं।
​इससे पहले भी एक बर्खास्त कर्मचारी की अलमारी से लगभग 2 लाख रुपये की दवाएं मिल चुकी हैं। जांच समिति ने बरामद सभी दवाओं को अपने कब्जे में लेकर स्टॉक और खरीद रिकॉर्ड से उनका मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) शुरू कर दिया है।

​📌 मरीजों के हक पर डाका: सरकारी योजनाओं के बजट से खरीदी गई थीं दवाएं
​शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला है। बरामद की गई दवाएं किसी निजी फंड की नहीं, बल्कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलने वाली सरकारी योजनाओं के बजट से खरीदी गई थीं:
​आयुष्मान भारत योजना
​मुख्यमंत्री राहत कोष
​प्रधानमंत्री राहत कोष
​बड़ा सवाल: जो दवाएं गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए उनके बेड तक पहुंचनी चाहिए थीं, वे अस्पताल के कर्मचारियों की अलमारियों में ताले के पीछे क्या कर रही थीं? जांच अधिकारी अब इस पूरे ‘सप्लाई चेन’ और इसमें शामिल चेहरों को बेनकाब करने में जुटे हैं।

​🚨 अब तक क्या-क्या हुई कार्रवाई?
​इस पूरे मामले में केजीएमयू प्रशासन अब तक कई सख्त कदम उठा चुका है:
​विभागाध्यक्ष (HOD) को हटाया: यूरोलॉजी विभाग के हेड को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है।
​निलंबन और बर्खास्तगी: एक नियमित फार्मासिस्ट को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 3 संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है।
​FIR और वसूली: बर्खास्त संविदा कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही, मैनपावर सप्लाई करने वाली बाहरी एजेंसी से नुकसान की वसूली (रिकवरी) की प्रक्रिया भी जारी है।

​🗣️ “कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा” — केजीएमयू प्रशासन
​केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच समिति इस समय बरामद दवाओं, खरीद प्रक्रिया, वितरण रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर के एक-एक पन्ने को खंगाल रही है।

​डॉ. सिंह ने साफ किया कि इस जांच की आंच जहां तक जाएगी, कार्रवाई उतनी ही सख्त होगी। यदि इस पूरे नेक्सस (गठबंधन) में केजीएमयू के कुछ अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
​आगे क्या? मामले की गंभीरता और कड़ियों को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े रसूखदारों के नाम इस घोटाले में सामने आ सकते हैं।

Previous articleफार्मेसी रत्न’ स्व. राम उजागिर पांडेय की 23वीं पुण्यतिथि पर फार्मासिस्टों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
Next articlePGI : 5kg वज़न की विशाल गर्भाशय की गाँठ (फाइब्रॉइड) की सफल सर्जरी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here