RLB अस्पताल राजाजीपुरम में सुरक्षाकर्मियों का फूटा गुस्सा, 3 महीने से वेतन न मिलने पर ठप किया काम

0
42

​● तीन महीने से नहीं मिली सैलरी; स्कूल की फीस और घर चलाने का संकट गहराया
​● अस्पताल परिसर में एक घंटे तक मची अफरा-तफरी, पार्किंग व्यवस्था हुई ध्वस्त

​लखनऊ। राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में मंगलवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने वेतन न मिलने से नाराज होकर कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया। आक्रोशित कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में ही अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

​क्यों भड़के सुरक्षाकर्मी?
​आर्थिक तंगी की मार: प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें महज 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। वह भी पिछले तीन महीनों से बकाया है।
​बच्चों की पढ़ाई प्रभावित: वेतन न मिलने के कारण बच्चों के स्कूल की फीस जमा करना मुश्किल हो गया है।
​भरण-पोषण का संकट: दुकानदारों का उधार बढ़ने से अब घर का राशन और रोजमर्रा का खर्च चलाना भी दूभर हो चुका है।

​अधिकारियों की अनदेखी: कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

​चेतावनी: “अगर हमारा बकाया वेतन जल्द जारी नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा।” — प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मी
​अस्पताल में 1 घंटे तक रहा ‘कमांड’ फेल, बेपटरी हुई व्यवस्था
​सुरक्षाकर्मियों के अचानक ड्यूटी छोड़ने का सीधा असर अस्पताल की पूरी व्यवस्था पर पड़ा। महज एक घंटे के भीतर ही अस्पताल परिसर की सूरत बदल गई:
​सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त: ओपीडी (OPD), जनरल वार्ड और मुख्य प्रवेश द्वारों से सुरक्षाकर्मी नदारद रहे, जिससे आने-जाने वालों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा।
​जाम के झाम में फंसे तीमारदार: पार्किंग व्यवस्था संभालने वाला कोई नहीं था। मरीजों और तीमारदारों ने जहां जगह मिली, वहीं गाड़ियां खड़ी कर दीं।
​मच गई अफरा-तफरी: कई वाहन एक-दूसरे के पीछे बुरी तरह फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

​प्रशासन के आश्वासन पर शांत हुआ मामला
​हंगामे और अफरा-तफरी की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को समझाया-बुझाया और ठेकेदार से बात कर वेतन की समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराने का पुख्ता आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारी काम पर लौटे और स्थिति सामान्य हो सकी।
​बड़ा सवाल: इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्सिंग (ठेके) पर काम करने वाले कर्मचारियों के भुगतान और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Previous articleयोगी कैबिनेट का निर्णय : होमगार्डों को 5 लाख तक का कैशलेस इलाज
Next articleबलरामपुर अस्पताल में हड़कंप : इमरजेंसी की छत पर 6 दिन से सड़ रही थी लाश, बदबू फैली तो खुला राज!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here