kgmu: मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं, सही प्रबंधन से आसान हो सकता है यह पड़ाव: डा रेखा सचान

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​क्वीनमेरी अस्पताल में आयोजित कार्यशाला में डॉक्टरों ने दिए रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के समग्र प्रबंधन और हार्मोन थेरेपी पर जरूरी टिप्स।

लखनऊ। रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) महिलाओं के जीवन का एक पूरी तरह से स्वाभाविक पड़ाव है। लेकिन आज भी सही जानकारी न होने के कारण कई महिलाएं इसे बीमारी मानकर मानसिक तनाव में आ जाती हैं। इस दौर की अधिकांश समस्याओं से समय पर डॉक्टर की सलाह, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) अपनाकर आसानी से बचा जा सकता है। यह महत्वपूर्ण बातें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (क्वीनमेरी) की डॉ. रेखा सचान ने साझा कीं।

​शनिवार को क्वीनमेरी में ‘रजोनिवृत्ति: द एजलेस केयर जर्नी-समग्र प्रबंधन एवं क्लिनिकल अपडेट्स’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जहाँ विशेषज्ञों ने मेनोपॉज से जुड़े कई वैज्ञानिक तथ्यों पर खुलकर चर्चा की।
​📌 क्या है मेनोपॉज और कब होती है HRT की जरूरत?
​कार्यशाला के दौरान डॉ. रेखा सचान ने बताया कि:
​परिभाषा: यदि किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म (पीरियड्स) न आए, तो उस स्थिति को रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज कहा जाता है।

​हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT): 45 से 55 वर्ष की महिलाओं में लक्षणों और जरूरत के अनुसार दी गई हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी सबसे अधिक लाभकारी साबित होती है।
​जीवनशैली में बदलाव: थेरेपी के साथ-साथ संतुलित आहार, हरी सब्जियां, कैल्शियम, विटामिन-डी, नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त रहना बेहद जरूरी है।

​⚠️ मेनोपॉज के बाद स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख चुनौतियाँ
​डॉक्टरों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे निम्नलिखित समस्याएं बढ़ सकती हैं:
​हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस)
​दिल संबंधी (हृदय) बीमारियों का खतरा बढ़ना
​मूत्र संबंधी समस्याएं और यूरिन इन्फेक्शन
​नींद न आना, चिड़चिड़ापन और अचानक बहुत तेज गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेस)
​विशेषज्ञ की सलाह: इन खतरों से बचने के लिए महिलाओं को समय-समय पर बोन मिनरल डेंसिटी (DEXA) स्कैन कराना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर तुरंत इलाज शुरू करना चाहिए।

​🚫 बिना डॉक्टरी सलाह के न लें हार्मोन की दवाएं
​कार्यशाला में डॉ. मंजुलता वर्मा ने महिलाओं को एक बड़ी चेतावनी देते हुए अपील की कि वे कभी भी बिना चिकित्सकीय परामर्श के बाजार से खरीदकर हार्मोन की दवाएं न खाएं। ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
​कार्यक्रम के दौरान डॉ. सोनिया लूथरा, डॉ. शालिनी सिंह और डॉ. वंदना ने भी रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं की हड्डियों, हृदय स्वास्थ्य और मूत्र-जननांग (Urogenital) स्वास्थ्य से जुड़े नए वैज्ञानिक तथ्यों और आधुनिक इलाजों की जानकारी साझा की।

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