यूरोलॉजी में 150 मरीजों के नाम पर हुआ खेल!
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में हुए करोड़ों रुपये के दवा घोटाले में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच समिति ने जब विभाग के आरोपी संविदा कर्मचारी की बंद अलमारी को खुलवाया, तो उसमें से लाखों रुपये की महंगी दवाएं बरामद की गईं।
शुरुआती जांच के मुताबिक, ये दवाएं करीब 150 मरीजों के नाम पर आयुष्मान भारत और असाध्य रोग योजना के तहत सरकारी बजट से मंगाई गई थीं।
बंद अलमारी में दवाओं का ज़खीरा, अवैध बिक्री का शक
बीते गुरुवार को जांच समिति की कड़ी निगरानी में अलमारी का ताला तोड़ा गया और सभी दवाओं का रिकॉर्ड तैयार किया गया। समिति ने दवाओं को अपने कब्जे में लेकर स्टॉक रजिस्टर और मरीजों के डेटा से मिलान शुरू कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि इन महंगी दवाओं को बाजार में अवैध रूप से बेचने की बड़ी साजिश थी। फिलहाल, बरामद दवाओं की कुल कीमत का सटीक आकलन किया जा रहा है, और इसकी रिपोर्ट सोमवार तक उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
”जांच केवल एक अलमारी तक सीमित नहीं है। यूरोलॉजी विभाग की सभी अलमारियों और स्टोर की तलाशी ली जा रही है। इसी दौरान एक अन्य अलमारी से भी लाखों की दवाएं मिली हैं।
डॉ. के.के. सिंह, प्रवक्ता (KGMU)
मरीजों को बांटी जा सकती हैं दवाएं
अधिकारियों के अनुसार, बरामद दवाएं मरीजों के इंडेंट (मांग पत्र) के आधार पर ही मंगाई गई थीं। अब मरीज-वार दवाओं की सूची तैयार की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद, इन दवाओं को असल जरूरतमंद मरीजों में बांटा जा सकता है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही होगा।
अब तक गाज गिरी इन पर:
इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन सख्त एक्शन मोड में है:
3 संविदा कर्मचारी: सेवा से बर्खास्त।
1 नियमित फार्मासिस्ट: सस्पेंड (निलंबित)।
विभागाध्यक्ष (HOD): पद से हटाए गए।
FIR दर्ज: आरोपी संविदा कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है।
इस खुलासे के बाद अब केजीएमयू के अन्य विभागों के स्टोर भी रडार पर आ गए हैं।










