राज्यपाल का कड़ा रुख: ‘अटल’ विचारों के साथ बदलें चिकित्सा व्यवस्था

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कैंसर की सस्ती दवाओं की जानकारी हर मरीज तक पहुँचाना जरूरी

लखनऊ। प्रदेश की राज्यपाल (कुलाधिपति) ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों, डॉक्टरों और विद्यार्थियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने जहाँ एक तरफ कैंसर की दवाओं के दाम कम होने का लाभ सीधे मरीजों तक पहुँचाने की बात कही। वह अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रही थी। समारोह में 11053 विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गई।

समारोह में राज्यपाल ने व्यवस्था पर बोलते हुए यूनिवर्सिटी के पूर्व अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए।
​कैंसर की दवाएं हुईं सस्ती: अस्पतालों में लगेंगे रेट बोर्ड
​कैंसर मरीजों को बड़ी राहत देते हुए भारत सरकार ने कैंसर की 17 प्रकार की दवाओं पर 100 प्रतिशत सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) समाप्त कर दिया है।
​दामों में भारी कमी: राज्यपाल ने निर्देश दिया है कि इस फैसले का व्यापक प्रचार-प्रसार हो।

​पारदर्शिता का आदेश: सभी चिकित्सा संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर बैनर, पोस्टर और साइन बोर्ड लगाए जाएं, जिनमें दवाओं के नाम, पहले की कीमत और वर्तमान कीमत स्पष्ट रूप से लिखी हो। ताकि कोई भी मरीज या तीमारदार गुमराह न हो।
​पूर्व कुलपति और अफसरों पर उठे सवाल, माँगा जवाब
​अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी की अव्यवस्थाओं पर राज्यपाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सवाल किया कि परिसर में 13 हॉल होने के बावजूद पिछले एक साल में केवल एक कार्यक्रम क्यों हुआ?

​कुलाधिपति के तीखे सवाल:
​डॉक्टरों के फ्लैट खाली क्यों पड़े हैं?
​मुख्य प्रशासनिक भवन की ऊपरी दो मंजिलों का उपयोग क्यों नहीं हुआ?
​लाइब्रेरी का इस्तेमाल इतना सीमित क्यों है?
राज्यपाल ने नव-नियुक्त कुलपति के बजाय पूर्व कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक और डीन के कामकाज की समीक्षा करने के आदेश दिए हैं।

​मेडिकल छात्रों को सफलता के ‘तीन मंत्र’ और समाज को नसीहत
​राज्यपाल ने युवा डॉक्टरों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, सेवा और सक्षम बनना—ये तीन मंत्र दिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को एआई (AI), रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक दवाओं जैसी नई तकनीकों से लगातार अपडेट रहना चाहिए। साथ ही, समाज से अपील की कि अगर कोई डॉक्टर घर देर से लौटे, तो नाराज न हों; वे किसी की जान बचाकर लौट रहे होते हैं।

​’अटल’ आदर्श, महापुरुषों के विचार और ‘गांव गोद’ योजना
​अटल जी के विचार प्रासंगिक: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को याद करते हुए राज्यपाल ने उनकी प्रसिद्ध पंक्ति उद्धृत की—”छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।”
​गांव गोद लें मेडिकल कॉलेज: ग्रामीण स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए राज्यपाल ने सुझाव दिया कि हर विश्वविद्यालय 5 गांव और हर मेडिकल कॉलेज 2 से 3 गांवों को गोद लेकर वहां टीकाकरण, स्वच्छता और गर्भवती महिलाओं की देखभाल का अभियान चलाए।
​पर्यावरण संकल्प: कुलाधिपति ने जल्द ही कुलपतियों की बैठक बुलाकर पौधरोपण अभियान की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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