इस कैम्पेन के साथ परीक्षा के समय बच्चों और परिवारों का बढ़ाया हौसला
मुंबई। अक्सर देखा जाता है कि परीक्षाओं का असर पूरे परिवार पर पड़ता है। कई घरों में परीक्षा का सीज़न अपने साथ ढेरों उम्मीदें और दबाव लेकर आता है। इसी बात को समझते हुए, निक इंडिया और अनन्या पांडे की ‘सो पॉजीटिव’ पहल ने हाथ मिलाया है। इस पहल को बच्चों और परिवारों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि वे परीक्षा के तनाव को स्वीकार करें और सरल व मज़ेदार तरीकों से इसे दूर भगा सकें।
यह पहल निक इंडिया के चल रहे ‘प्रेशर को बोलो बाय’ अभियान का हिस्सा है। यह माता-पिता को प्रोत्साहित करती है कि वे अपने बच्चों की अनोखी क्षमताओं और उनके सीखने के तरीके को पहचानें। यह अभियान बच्चों की तुलना दूसरों से करने के बजाय, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने पर ज़ोर देता है। वहीं, ‘सो पॉजीटिव’ का उद्देश्य बच्चों और युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं पर होने वाली बातचीत को अधिक सरल और सहज बनाना है। अनन्या को उम्मीद है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों और उनके परिवारों के लिए अपनी भावनाओं पर खुलकर बात करना आसान हो जाएगा।
इस ज़मीनी स्तर पर एक खास गतिविधि का नेतृत्व अनन्या पांडे ने किया। निक के लोकप्रिय किरदारों—चीकू और बंटी व उनके दोस्तों के साथ मिलकर बच्चों ने गुब्बारों पर अपनी रोज़मर्रा की परीक्षा की चिंताएं लिखीं। फिर इन गुब्बारों को फोड़कर तनाव दूर करने के आसान उपाय खोजे गए। इस तरह उस ‘अनदेखे दबाव’ को ऐसी चीज़ में बदल दिया गया जिसे बच्चे देख सकते थे, साझा कर सकते थे और दूर कर सकते थे। अनन्या की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि परीक्षा का तनाव सामान्य है और छोटे-छोटे बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं।
इस पहल पर बात करते हुए अनन्या पांडे ने कहा, “परीक्षा का दबाव लगभग हर छात्र महसूस करता है, लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि यह आपकी पहचान तय नहीं करता। बड़े होते हुए मैंने महसूस किया कि तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है—थोड़ा रुकना, गहरी सांस लेना और खुद को यह याद दिलाना कि परीक्षा एक बहुत बड़ी यात्रा का बस एक छोटा सा हिस्सा है। मुझे निक के ‘प्रेशर को बोलो बाय’ अभियान की यह बात बहुत पसंद है कि यह बच्चों और माता-पिता को तनाव पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित करता है।
आजकल ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए देशभर में परीक्षा के तनाव पर ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में यह पहल इस मुद्दे को सीधे बच्चों और उनके परिवारों के बीच ले जाती है, ताकि परिवार अधिक सहजता और आत्मविश्वास के साथ परीक्षाओं का सामना कर सकें।












