लोहिया संस्थान: विशेषज्ञों ने बनाया शिशुओं के लिए देश का पहला AI लिवर एप

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लखनऊ। गोमती नगर स्थित डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह यह नवजात शिशुओं के लिए लिवर रोग के पहचान के लिए वरदान साबित होगी। यहां के बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ के डॉक्टर्स और तकनीकी टीम ने देश का पहला नवजात शिशुओं में लिवर रोगों की समय रहते पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐप बनाया है । संस्थान के प्रवक्ता डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष ‘लिवर पॉप’ ऐप को बाल रोग विशेषज्ञों की एक अनुभवी टीम के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

विशेषज्ञों की प्रमुख टीम:

लिवर और बाइलरी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए विकसित इस ऐप में विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिनमें शामिल हैं: डॉ. दीप्ति अग्रवाल (Dr. Dipti Agarwal): विभाग की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, जिनके पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। डॉ. नेहा ठाकुर राय (Dr. Neha Thakur Rai): वरिष्ठ विशेषज्ञ। डॉ. कृष्ण कुमार यादव (Dr. Krishna Kumar Yadav): प्रमुख विशेषज्ञ। डॉ. शैतांशु श्रीवास्तव (Dr. Shetanshu Srivastava): विशेषज्ञ टीम के सदस्य। डॉ. पीयूष उपाध्याय (Dr. Piyush Upadhyay): टीम के सक्रिय सदस्य है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

यह ऐप बुधवार को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा। लोहिया संस्थान के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भुवन तिवारी के अनुसार, नवजात शिशुओं में बाइलरी रोगों की देरी से पहचान घातक हो सकती है। यह ऐप मल के रंग की फोटो के आधार पर 40 अलग-अलग भाषाओं में 22 भारतीय और 18 विदेशी भाषाओं में प्रारंभिक संकेत देने में सक्षम है। उन्होंने बताया शिशुओं में लिवर संबंधी बीमारियां देर से पहचान होने के कारण अक्सर जटिल कारण बन सकती हैं। इस एआई ऐप की सहायता से तीमारदार और स्वास्थ्य कर्मियों को बहुत मदद मिलेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

: इस ऐप की मुख्य विशेषताएं:

त्वरित जांच: यह ऐप मोबाइल कैमरे का उपयोग करके शिशु की त्वचा और आंखों के रंग का विश्लेषण करता है।

बिना सुई के परीक्षण: इसके लिए बार-बार खून के नमूने लेने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे नवजात को दर्द नहीं होता।

समय की बचत: दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग घर बैठे ही शुरुआती जांच कर सकते हैं और गंभीर स्थिति होने पर तुरंत अस्पताल जा सकते हैं।

सटीकता: संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऐप काफी सटीक परिणाम देता है और ‘बिलीरुबिन’ के स्तर को समझने में मदद करता है।

 

 

 

यह तकनीक विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है ,जिन्हें जन्म के तुरंत बाद पीलिया की शिकायत होती है।

 

 

 

 

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