वरिष्ठ संवाददाता रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। जीएसटी की फर्जी फर्म बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए टैक्स चोरी किए जाने वाले संदिग्ध लोगो को रडार पर लेकर इंटेलिजेंस बेस पुख्ता जांच करवायी जा रही हैं।
यह जानकारी राज्य जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान इकाई ( एसआईबी) जोन प्रथम के अपर आयुक्त मनोज विश्वकर्मा ने सोमवार को मीडिया से हुई बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने डाटा एनालिसिस व वैकिल ट्रैकिंग ऐप के जरिए फर्जी फर्म के एक बड़े मामले का खुलासा किया है जिसमें 3 करोड़ 11 लाख के फर्जी आईटीसी क्लेम का मामला सामने आने के बाद कई स्थानों पर छापेमारी की गई इसके बाद 2 करोड़ 10 लाख के राजस्व वसूली की गई है।
मनोज विश्वकर्मा वर्ष 2001 बैच के सीधी भर्ती के पीसीएस अधिकारी हैं आपकी पहली तैनाती सहायक आयुक्त सचल दल अलीगढ़ मैं हुई इसके बाद श्री विश्वकर्मा देवरिया में भी सहायक आयुक्त सचल दल रहे। लखनऊ एसआईबी चीफ के पद पर तैनाती से पूर्व ये राज्य जीएसटी मुख्यालय लखनऊ मे संयुक्त सचिव एसटीएफ केंद्रीय सचल दल व संयुक्त आयुक्त कारपोरेट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। मनोज विश्वकर्मा ने बताया कि डाटा एनालिसिस के दौरान उनको एक सर्जिकल फॉर्म की गतिविधियों पर संदेह हुआ इसके बाद गहन डाटा विश्लेषण व रिकी के दौरान पुख्ता सबूत मिले कि उक्त फॉर्म द्वारा जिन फर्मों से माल की खरीद दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट को अपनी कर की देयता मे समायोजित लिया जा रहा है वास्तव में वह फार्मा फर्जी है।
इस जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा की सर्जिकल फॉर्म ने ई वे बिल के जरिए जिन वाहनों से माल को लखनऊ लाया जाना दिखाया था उन ट्रैकों को ट्रैकिंग डिवाइस के जरिए रडार पर लिया गया तो यह बात सामने आई की जिन तिथियां में ट्रैकों को लखनऊ आना दिखाया गया है उन तिथियां में यह ट्रक मुंबई से कर्नाटक के लिए यात्रा कर रही थी यानी की माल के बिना खरीद के ही उस पर देय टैक्स को आरटीसी में सामायोजित करके सर्जिकल फॉर्म अपनी टैक्स की देनदारी से बच रही थी कई टीमों द्वारा एक साथ की गई छापेमारी में कई अहम सबूत मिलने के बाद 2 करोड़ 10 लाख की धनराशि डीआरसी 03 के जरिए राजकोष में जमा कर ली गई है शेष धनराशि की वसूली की कार्रवाई जारी है।












