नियुक्ति पत्र ना दिए जाने पर होम्योपैथी फार्मासिस्टों का विधान भवन के सामने प्रदर्शन , पुलिस ने किया गिरफ्तार

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लखनऊ। चार वर्षों से नियुक्ति पत्र ना दिए जाने से आक्रोशित होम्योपैथी फार्मेसिस्टों ने विधान भवन के सामने प्रदर्शन करते हुए भाजपा कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने की कोशिश की लेकिन इससे पहले उनको पुलिस बल ने आगे बढ़ने से रोक लिया और गिरफ्तारी शुरू कर दी इस दौरान फार्मासिस्टों की पुलिस बल से तीखी नोकझोंक भी हुई। फार्मासिस्टों का कहना है अब उनका परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन चलता रहेगा। कल से फार्मासिस्ट इको गार्डन में एकत्र होकर के धरना देते हुए प्रदर्शन कर रहे है।
2019 से नियुक्ति की बाट जो रहे होम्योपैथिक फार्मेसिस्ट ने आज सैकड़ों की संख्या में एकत्रित होकर इको गार्डन मैं धरना दे रहे है।

 

 

 

धरने को फार्मासिस्ट फेडरेशन ने समर्थन देते हुए फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया उन्होंने कहा कि बेरोजगार फार्मासिस्ट 2019 से परेशान है जिनकी नियुक्ति बेवजह विवादित बनाई जा रही है।

 

 

ज्ञातव्य है कि होम्योपैथिक विभाग की फार्मासिस्ट भर्ती, विज्ञापन संख्या 02-परीक्षा /2019( UPSSSC ) में चयनित होम्योपैथिक फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों द्वारा 4 साल से लंबित फार्मासिस्ट भर्ती में नियुक्ति ना होने के संबंध में अपनी मांगों को लेकर इको गार्डन में अनवरत चलने वाले आमरण अनशन का प्रारंभ किया.
अभ्यर्थियों का कहना है कि होम्योपैथिक फार्मासिस्ट भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में माह फरवरी, 2019 से चल रही है। विज्ञापन जारी होने के लगभग 2 वर्ष 6 माह पश्चात आयोग ने उक्त भर्ती का अंतिम चयन परिणाम 22 नवंबर 2021 को जारी किया था। आयोग द्वारा जारी किए गए अंतिम चयन परिणाम में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में चयन को लेकर असफल अभ्यर्थियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में वाद दायर किए गए।
उच्च न्यायालय की इलाहाबाद खंडपीठ ने आयोग द्वारा जारी किए गए। अंतिम चयन परिणाम को सही मानते हुए ईडब्ल्यूएस कैटेगरी से संबंधित सभी वादों को खारिज करके नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे, जबकि उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने ईडब्ल्यूएस कैटेगरी की मात्र 10% सीटों पर ही रोक लगाई थी एवं अतिरिक्त सीटों पर आयोग को नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। किंतु उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अपने मनमानी रवैये को बरकरार रखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को किसी भी दशा में अग्रेषित नहीं कर रहा है।
फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सुस्त कार्यप्रणाली एवं ईडब्ल्यूएस केस निस्तारण के लिए आयोग एवं शासन द्वारा नियुक्त महाधिवक्ता / अपर महाधिवक्ता एवं मुख्य अधिवक्ता द्वारा केस की सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित ना होने की वजह से होम्योपैथिक फार्मासिस्ट भर्ती विगत 4 वर्षों से लंबित पड़ी है। आयोग लंबित वादों के निस्तारण एवं भर्ती प्रक्रिया को पूरी करने में कोई रूचि नहीं दिखा रहा है। आयोग द्वारा असफल अभ्यर्थियों की वजह से समस्त सफल चयनित अभ्यर्थियों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में हो रहे विलंब के चलते चयनित बेरोजगार होम्योपैथिक फार्मासिस्ट अभ्यर्थी एवं उनके परिजन सामाजिक, मानसिक, आर्थिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ना झेल रहे हैं।

 

 

होम्योपैथिक फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग एवं शासन द्वारा ईडब्ल्यूएस केस निस्तारण के लिए नियुक्त महाधिवक्ता / अपर महाधिवक्ता एवं मुख्य अधिवक्ता केस की सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित होकर

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