लखनऊ। लोगों में अब थायराइड ग्रंथि की दिक्कत तेजी से बढ़ रही है। अगर समय पर इलाज से कराया जाए तो बीमारी ठीक हो सकती है। इलाज में देर मरीज की स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है आैर इलाज जटिल हो जाता है। यह बात पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन ने शुक्रवार को पीजीआई एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित रोबोटिक और ओपन थायरॉइडेक्टॉमी पर लाइव कार्यशाला में कही। कार्यशाला में प्रमुख एंडोक्राइन सर्जन्स ने एक घंटे के वीडियो आधारित व्याख्यान दिया। इसके बाद लाइव ऑपरेटिव सर्जरी की गयी। कार्यशाला में चर्चा की गयी कि हेपेटोबिलियरी, पैक्रियांज की भी रोबोटिक सर्जरी शुरू करने पर तैयारी चल रही है।
लाइव सर्जरी में बताया गया कि सोलह वर्षीय युवती की थॉयराइड ग्रंथि की परेशानी थी। इसे सर्जरी से दूर कर दी गयी। एंडोक्राइन सर्जरी विभाग प्रमुख डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि लाइव ऑपरेटिव सर्जरी वर्कशॉप पहला केस इसी लड़की का रखा गया। सीएमसी वेल्लोर के डॉ. दीपक अब्रााहम ने ओपन टोटल थायराइडेक्टॉमी की सर्जरी की। उन्होंने इंट्रा-ऑपरेटिव न्यूरोमोनिटोरिंग तकनीक का प्रदर्शन किया।
यह तक नीक सर्जरी के दौरान आवर्तक स्वरयंत्र तंत्रिका के संरक्षण का पता लगाने में मदद करता है। स्वर यंत्र के नर्व से सिंगल यंत्र को मिलता है, जिससे पता चलता है कि सर्जरी के दौरान स्वर यंत्र सुरक्षित है। थायरयाड ग्रंथि स्वर यंत्र के पास होती है जिसके कारण सर्जरी के दौरान स्वर यंत्र के क्षति ग्रस्त होने के आशंका रहती है। अंतिम सत्र फिर से एक वीडियो आधारित व्याख्यान सत्र था, जिसके वक्ता केजीएमसी, लखनऊ से डॉ. पूजा रमाकांत और मेदांता लखनऊ के डॉ. आलोक गुप्ता थे। उद्घाटन में डॉ अनीश श्रीवास्तव, डीन, एसजीपीजीआईएमएस, डॉ विवेक बिंदल, रीजेंट, क्लिनिकल रोबोटिक सर्जरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया, और संस्थान के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रमुख व रोबोटिक सर्जरी प्रोग्राम के नोडल अधिकारी प्रोफेसर अमित अग्रवाल शामिल थे।












