
लखनऊ। कोरोना में पोस्ट कोविड कॉम्प्लीकेशन्स से उभरने वाली बीमारियों का कोई सटीक इलाज तो सामने नहीं आया है, लेकिन स्टेम सेल थेरेपी एक ऐसी उम्मीद की किरण है जो लाखों लोगों को पोस्ट कोविड में लंग फाइब्रोसिस से उबरने में मदद करता है। यह जानकारी कानपुर मेडिकल कालेज के डा. बीएस राजपूत ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि तमाम रोगी ऐसे हैं जिन्हे कोविड के बाद लंग फाइब्रोसिस या इंटरस्टीशियल लंग डिजीज का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे रोग से ग्रसित लोगों की सांस फूलती है और बार-बार सूखी खांसी आती है। इसके साथ ही मेडिकल आक्सीजन की आवश्यकता होती है। फेफड़ों के विशेषज्ञों के अनुसार यह एक बहुत ही विकट समस्या है।
उन्होंने बताया कि ऑटिज्म, रीढ़ की हड्डी की चोट, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और एएलएस जैसे तंत्रिका रोगों के कई मामलों में स्टेम सेल थेरेपी का सफ़ल इलाज पहले से ही किया जा रहा है। ऐसे में फेफड़े के फाइब्रोसिस के मरीजों को स्टेम सेल थेरेपी से बड़ी राहत मिलेगी। डॉ राजपूत ने लखनऊ की एक मरीज़ (महिला) की बोन मैरो का प्रयोग कर स्टेम थेरेपी के माध्यम से इलाज कर उन्हें राहत भी पहुचाया है। महिला को वर्ष 2016 से पहले से ही फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थी। अप्रैल 2021 में कोविड से संक्रमित होने के बाद, वह बच तो गयी, लेकिन फेफड़े में फाइब्रोसिस से पीड़ित हो गयी, जिसका वर्तमान में कोई निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। उसे जीवित रहने के लिए चौबीसों घंटे मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। ऐसे में महिला का विशेष तकनीक से स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कि या गया।
पिछले तीन महीनों के दौरान रोगी में काफी सुधार हुआ है। उसकी मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता 50 प्रतिशत कम हो गयी है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग स्टेम सेल प्रत्यारोपण में ज्यादा खर्च होने के कारण इस तकनीक का प्रयोग करने से कतराते हैं, लेकिन स्टेम सेल थेरेपी भी बीमा कंपनियों के दायरे में आ गया है। यहां तक कि पीएम रिलीफ फंड और सीएम रिलीफ फंड भी बोन मैरो सेल ट्रांसप्लांट के लिए गरीब मरीजों की मदद कर रहे हैं।












