लखनऊ। कोरोना काल में चिकित्सा व्यवस्था चरमराने के कारण कई बीमारियों के मरीज डाक्टरों से सही परामर्श नहीं ले सके। ऐसे में दवाओं के सेवन व नियमित जांच में दिक्कत होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन्हीं में मिर्गी बीमारी के मरीज भी रहे। जो कि ओपीडी में डाक्टर के पास समय पर नहीं पहुंच सके। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिर्गी का दौरा पड़े पर मरीज को करवट के बल लिटा देना चाहिए। बशर्ते यह ध्यान रखें कि मरीज का मुंह नीचे की तरफ रहे। ताकि उस वक्त बनने वाला मुंह की झाग, उल्टी बाहर निकल जाए।
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस की पूर्व संध्या पर पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील प्रधान का कहना है कि एक धारणा के अनुसार अक्सर मिर्गी के दौरे पड़ने के दौरान आसपास मौजूद लोग मरीज को जूता सुघाने लगते है। उसके मुंह में कपड़ा लगाते हैं, जिसकी वजह से झाग मुंह के भीतर जाकर सांस की नली में फंस सकता है आैर मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है।
डॉ. प्रधान ने बताया कि मिर्गी का दौरा पड़ने के बाद मरीज की स्थिति थोड़ा सा भी ठीक होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिंए। उन्होंने बताया कि मिर्गी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसमें मरीज को बार-बार दौरे पड़ते है। मरीज का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है। उसका शरीर लडख़ड़ाने लगता है। इस बीमारी की पुष्टि हो जाने पर दवाएं नियमित खाना चाहिए। लगभग आठ घंटे की पूरी नींद लेना चाहिए। अगर नींद नही आ रही हो तो तत्काल डॉक्टर की परामर्श लें।
डॉ. प्रधान ने बताया कि यदि जन्म होते ही बच्चा न रोये तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि जन्म होते ही जब बच्चा पहली बार रोता है, तभी ऑक्सीजन बच्चे के शरीर में जाती है।
उन्होंने परामर्श दिया कि बाइक चलाते समय हेल्मेट जरूर लगाएं। कार चलाते समय सीट बेल्ट लगाएं। वाहन चलाते समय तनाव कतई न लें। हरी एवं पत्तेदार सब्जियां अच्छे से धुलकर खाएं। ताकि सब्जी में मौजूद कीड़े दिमाग मे न जाने पाएं। घनी आबादी में रहने या जाने से बचें। इस बीमारी का कारण सिर पर चोट लगना, नवजात के दिमाग में ऑक्सीजन के प्रवाह का कम होना, ब्रोन ट्यूमर, दिमागी बुखार और इंसेफेलाइटिस और ब्रोन स्ट्रोक है। इसके लक्षण दौरे पडा, मुंह से झाग निकलना, बेहोशी आना, गिर पड़ा, गुमसुम रहना, हंसना, व्यवहार में बदलाव आना प्रमुख है।
अन्य विशेषज्ञों की मानें तो मिर्गी पूरी तरह से नियंत्रित रहने वाली बीमारी है। दवाओं का सेवन समय पर करना चाहिए आैर डाक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए। डाक्टरों के द्वारा बताये गये सलाह को मानना चाहिए।












