लखनऊ। रविवार को कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 5187 पहुंची। अगर देखा जाए तो पिछले एक सप्ताह से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या पांच हजार से कम नही हुई है। हालांकि कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 6247 रही। इसकेअलावा कल की अपेक्षा राजधानी के कोविड अस्पतालों में 14 मरीजों की कोरोना संक्रमण से मौत हो गयी।
राजधानी में कोरोना संक्रमण कम होने की बजाय व्यापक होता जा रहा है। रविवार को भी राजधानी में 5187 मरीज को कोरोना संक्रमित मिलने के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग हलकान हो गया है। लगातार संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा बनी रहने से मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर नहीं मिल पा रहा है आैर वह होम आइशोलेन में तबियत बिगड़ने पर आक्सीजन सिलेंडर मंहगे दामों पर खरीदने को मजबूर है। कोरोना संक्रमण से मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मी भी अछूते नहीं है। केजीएमयू के बाद लोहिया संस्थान में लगातार डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मी कोरोना संक्रमित हो रहे है। यहां पर तीन विभागों में अलग अलग डाक्टर कोरोना संक्रमित हो गये। कई विभागों में ज्यादा संख्या में डाक्टर संक्रमित हो चुके है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण में स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा संविदा कर्मी भी संक्रमण की चपेट में आ रहे है। उनका कहना है कि उनकी ड्यूटी लगातार कोविड हास्पिटल में लग रही है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण राजधानी के लगभग सभी क्षेत्रों में व्यापक हो जा रहा है। पुराने लखनऊ से लेकर आवासीय कालोनियों तक संक्रमण से पीड़ित मरीज लगातार मिल रहे है। वहीं राजधानी में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 6247 है। हालांकि यह आंकड़ा संक्रमित मरीजों से ज्यादा है। वहीं राजधानी के विभिन्न कोविड हास्पिटलों में कोरोना संक्रमण से 14 मरीजों की मौत हो गयी। शनिवार को 42 मरीजों की मौत के बाद यह आंकड़ा आज बहुत कम है। आज अलीगंज स्थित अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट अोपी पाडेंय की मौत से फार्मासिस्टों में शोक व्याप्त है। इनका इलाज केजीएमयू के कोंिवड हास्पिटल में चल रहा था। बताया जाता है कि एक दिन पहले पत्नी की भी कोरोना संक्रमण से मौत हो गयी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के अस्पतालों में काफी संख्या में कोरोना संक्रमण के गंभीर संख्या में मरीज है, इस कारण नॉन कोविड अस्पतालों में भर्ती होने के बाद पाजिटिव आने पर उन्हें रेफर करने के बाद भी बिस्तर नही मिल पा रहा है। बताया जाता है कि एल थ्री के अस्पतालों में वेंटिलेटर नहीं खाली है आैर गंभीर मरीजों कों शिफ्ट करने में मुश्किल हो रहा है। इलाज कर रहे डाक्टरों का कहना है कि काफी संख्या में मरीज आक्सीजन लेबल बहुत कम होने पर पहुंचते है आैर भर्ती होने में आक्सीजन प्वाइंट तक पहुंचते – पहुंचते उनकी मौत हो जाती है।












