“कोरोना” के आगे हासिये पर “टीबी “

जिला क्षय रोग अधिकारियों की मनमानी से टीबी रोगियों की खोज में भारी गिरावट।

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न्यूज। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1993 में ग्लोबल इमरजेंसी घोषित हो चुकी टीबी की बीमारी वर्तमान समय मे कोरोना की तुलना में हासिये पर पहुंच चुकी है। परिणाम स्वरुप विगत दो माह में टीबी नोटीफिकेसन की दर में भारी कमी आयी है। माह मार्च 19 एवं 20 तथा माह अप्रैल 19 एवं 20 की तुलना करने पर प्राप्त आंकडे चौकाने वाले हैं। मार्च 20 में जहाँ टीबी नोटीफिकेसन की दर में लगभग 50 प्रतिशत की वहीं माह अप्रैल मे लगभग 80 प्रतिशत की कमी आयी है। जबकि टीबी के संक्रमण एवं मृत्यु की दर कोरोना की अपेक्षा कई गुना ज्यादा है।बीमारी की इसी भयावहता को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसे 2025 तक समाप्त करने का संकल्प लिया गया था।

सूत्रों की मानें तो टीबी रोगियों की खोज में आयी उपरोक्त कमीं की वजह लाकडाउन के साथ साथ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मानव संसाधन का सही उपयोग न करना भी है। गौरतलब है कि कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी कर्मचारियों से आनलाइन/टेलीफोनिक सर्विलांस का कार्य लिए जाने के आदेश जारी किये गये थे,जिससे वह कोरोना के साथ साथ टीबी मरीजों से जुडे कार्य भी सम्पादित कर सकें।किन्तु अधिकतर जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं जिला क्षय रोग अधिकारियों द्वारा इन कर्मचारियों से “डोर टू डोर” सर्विलांस,संदिग्धों के सैम्पल लेने जैसे अन्य फील्ड कार्य इन कर्मचारियों को दे दिये गये ।चूंकि टीबी नियंत्रण में कार्यरत लगभग सभी कर्मचारी संविदा के आधार पर कार्यरत हैं,अतः वह इसका विरोध भी नहीं कर सकते थे, और बिना पर्याप्त सुरक्षा के वह इस कार्य में लग गये,जिससे टीबी मरीजों की खोज एवं अन्य कार्य प्रभावित होते गये।

शासन को इसकी भनक लगते ही, प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य श्री अमित मोहन प्रसाद द्वारा दिनांक 18 अप्रैल को एक आदेश जारी कर टीबी मरीजों से संबंधित समस्त गतिविधियों यथा टीबी मरीजों की खोज,उपचार, पोषण भत्ते का खातों मे हस्तांतरण तथा समस्त माइक्रोस्कोपी केन्द्रों पर आवश्यक सुरक्षा उपकरण एवं सामग्री देकर उन्हें पूर्व की भांति क्रियाशील किये जाने के निर्देश जारी कर दिये गये। किन्तु ज्यादातर जिलों के जिम्मेदार अधिकारी इस शासनादेश की अवहेलना करते हुए अभी भी टीबी कर्मचारियों से कोरोना से सम्बंधित फील्ड का कार्य ले रहे हैं। टीबी मरीजों की खोज के संबंध में विशेषज्ञों की मानें तो मार्च से लेकर सितम्बर तक का समय टीबी रोगियों की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है ऐसे में यदि इन कर्मचारियों को इनके मूल कार्य पर वापस न भेजा गया तो टीबी नोटीफिकेसन की दर में भारी कमी आयेगी जो कि बेहद घातक होगी,क्योंकि टीबी से संक्रमित एक रोगी निदान एवं उपचार के अभाव में 10से15 स्वस्थ व्यकितयों को संक्रमित कर देता है।

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