लखनऊ। बेरियाट्रिक सर्जरी से मोटापा ही नहीं डायबिटीज, स्लीपएप्नीया तथा आर्थराइटिस ठीक किया जा सकता है। इस सर्जरी को कराने के लिए अब ज्यादा तत्पर हो रहे है। केजीएमयू के सर्जरी विभाग में यह सर्जरी मात्र 40 से 50 हजार रुपये तक में हो जाती है,जब कि अन्य निजी चिकित्सा संस्थानों में चार से पांच लाख रुपये तक का खर्च आता है। यह जानकारी लेप्रोस्कोपिक सर्जन डा. अवनीश ने जनरल सर्जरी स्थापना समारोह के तहत चल रहे शैक्षणिक कार्यक्रम में दी। विभाग का शनिवार को स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया जाएगा। केजीएमयू के कलाम सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञ सर्जन अपडेट क्लीनिकल की जानकारी देंगे।
डा. अवनीश ने बताया कि बेरियाट्रिक सर्जरी दो प्रकार की होती है। पहले में जिनका बॉडी मॉस इंडेक्स चालीस केजी पर मीटर स्क्वायर मीटर होता है, तो आम तौर पर लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्टेटमी सर्जरी करते है। इस सर्जरी में आमाशय में स्टेपलर तकनीक से पतला का एक विशेष प्रकार की ट्यूब डाल दी जाती है। इसके बाद दूसरी प्रकार की सर्जरी को गैस्टिक बाईपास कहते है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में आमाशय को काट कर छोटा कर दिया जाता है। इसके बाद इसे सीधे छोटी आंत में जोड़ दिया जाता है। इस प्रकार की सर्जरी डायबिटीज के साथ ज्यादा वजन होने पर होता है।
उन्होंने बताया कि दोनों प्रकार की बेरियाट्रिक सर्जरी करने पर मरीजों में आर्थराइटिस, डायबिटीज के साथ स्लीएप्नीया नामक बीमारी को ठीक होते देखा गया है। इस सर्जरी के बाद पूरी तरह फिट होने पर मरीज को निर्धारित डाइट व व्यायाम करने की भी सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि बढ़ता वजन ही सभी बीमारियों की जड़ है। अगर शुरू से ही व्यायाम व डाइट पर नियंत्रित करके चला जाए , तो इस प्रकार की सर्जरी करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि आज के चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में विभिन्न बीमारियों की जानकारी दी जाएगी।
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