लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर में रेजीडेंट डाक्टर के साथ ही निजी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर का स्टाफ मरीजों की दलाली में फंस गया है। अब पुलिस के अलावा शासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम भी हॉस्पिटल की जांच करेगी। शासन ने ट्रामा सेंटर में पकड़े गये निजी अस्पतालों का दलालों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है। इस क्रम में पुलिस भी सीसीटीवी फुटेज समेत अस्पताल संचालक की सीडीआर भी चेक करेगी। अब पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों की जांच करेगी। रिपोर्ट आने बाद अस्पताल का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मंजू मल्टीस्पेशलियटी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा का संचालन डॉ. आरपी सिंह कर रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर से मरीजों की शिफ्टिंग कराते वक्त अस्पताल कर्मचारी राजकुमार कुशवाहा व एंबुलेंस चालक कुलदीप को पकड़ा गया था। केजीएमयू प्रशासन ने दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया था।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेजा दिया। अस्पताल संचालक ने प्राक्टर डा. आरए एस कुशवाहा को अपने यहां का स्टॉफ न होने की दावा कर रहे हैं, उन्होंने एंबुलेंस चालक कुलदीप पर एंबुलेंस गायब किए जाने का आरोप लगाकर संबंधित थाने में तहरीर दी है, ताकि वह आसानी से मामले से बच सके। शासन ने सीएमओ को पत्र भेजकर मरीज शिफ्टिंग में लगे निजी अस्पताल की गहनता से जांच कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज संग मोबाइल की सीडीआर निकलवाया जाएगा ,ताकि कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सके। चौक कोतवाली के जांच अधिकारी एसआई अखिलेश मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच के लिए जल्द ही अस्पताल संचालक समेत अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। सीएमओ डा. नरेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि पुलिस के साथ निजी अस्पताल की जांच कराया जा रहा है। सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल ले जाना गंभीर आरोप है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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