लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की लगातार मिल रही शिकायतों को शासन गम्भीर हो गया है। तत्काल प्रभाव से कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट की गयी शिकायतों की जांच के आदेश दे दिए हैं। हाल के ही वर्षो में जनप्रतिनिधियों व अन्य शिकायतों के आधार पर जांच की जाएगी। जांच के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरींय कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये गये है।
बताते चले कि केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट के अप्रैल में तीन वर्ष समाप्त हो रहे हैं। इस कार्यकाल में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाये गये हैं। जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ताअों व अन्य संगठनों ने प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री व लोकायुक्त को भेजी गयी शिकायतों के साथ पुख्ता दस्तावेज भी बतौर सबूत भेजने का दावा किया गया है। यही नहीं केजीएमयू के कई डाक्टर भी कुलपति पर मनमाने निर्णय करने व पद के दुरुपयोग के आरोप लगाकर न्यायालय जा चुके हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर शासन गंभीर हो गया है आैर कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट की जांच कराने के निर्देश दे दिये है। चार फरवरी को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने जांच संबंधी आदेश जारी कर दिए है।
जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी में मंडलायुक्त को अध्यक्ष, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को सदस्य, वित्त नियंत्रक कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा सदस्य होंगे। इसके साथ ही केजीएमयू के कुलसचिव आशुतोष कुमार, वित्त अधिकारी मो. जमा को संबंधित प्रकरणों पर आवश्यक दस्तावेज देने के लिए कहा गया है। इस बारे में कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने अपना कोई बयान जारी नहीं किया। बल्कि केजीएमयू मीडिया प्रवक्ता डा. सुधीर सिंह अभी जांच संबंधी कोई जानकारी कुलपति कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। जानकारी होने पर अवगत कराया जाएगा। हालांकि कुलसचिव व वित्त कार्यालय ने जांच सम्बधी निर्देश मिलने की बात स्वीकार की है, लेकिन किसी प्रकार की टिप्पणी करने से मना कर दिया है।
प्रमुख शिकायतें यह है
– उप चिकित्सा अधीक्षक पद पर तैनाती में मनमानी करना तथा विज्ञापन में बदलाव करने का आरोप
-कुछ सेवानिवृत्ति कर्मियों को ओएसडी, पीएस आदि बनाना
– कुलपति कार्यकाल में रेजीडेंट भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होना
– जूनियर डॉक्टरों की भर्ती में आरक्षण नियमों की अवहेलना
– सरकारी बजट में मरीजों की दवा, इंप्लांट की लोकल पर्चेज खरीद में गड़बड़ी
– जननी सुरक्षा योजना व आयुष्मान भारत से लोकल पर्चेज दवा में भी खामियां
– ऑनलाइन शुल्क में फर्जीवाड़ा कर बड़े घोटाला का कई बार आरोप
– डॉक्टरों पर कार्रवाई के मनमाने फैसले लेना। उन्हीं निर्णयों पर न्यायालय द्वारा गलत बताना आदि है।
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