लखनऊ। मुख्यमंत्री के तमाम निर्देशों के बाद भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर यूनिट तैयार नहीं हो पायी है। ऐसे में एक मात्र सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर यूनिट लगाने की योजना पूरी नहीं हो पा रही है। दूरदराज से आने वाले बच्चों को केजीएमयू रेफर कर दिया जाता है। जहां पर पहले से बच्चों की वेंटिग चल रही होती है।
प्रदेश सरकार ने सिविल अस्पताल के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर यूनिट शुरू करने का निर्णय लिया था। इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट भी स्वीकृत हो गया था। वेंटिलेटर उपकरण खरीदने के साथ ही सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम भी लगाना आवश्यक था। वेंटिलेटर यूनिट की खरीद सीएमएसडी को करनी थी। यह योजना कागजों में चलने लगी। पहले तो सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम लगाने के लिए महीनों लग गये, जब यह लग गया तो वेंटिलेंटर यूनिट खरीद में लापरवाही बरती जाने लगी। अस्पताल प्रशासन के हस्तक्षेप करने पर बड़ी मुश्किल से वेंटिलेटर उपकरण तो आये, लेकिन उसे स्टालेशन करने में देर होने लगी। वेंटिलेटर उपकरण तो लगे तो पता चला कि मॉनीटर ही खरीदा गया।
जब मॉनीटर खरीदने की बात आयी तो इसकी जिम्मेदारी कारपोरेशन को दी गयी है। अब कारपोरेशन मॉनीटर खरीदने की तैयारी कर रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मॉनीटर बीस से 25 दिन में आने की उम्मीद है। ऐसा नही है कि सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर यूनिट संचालन के लिए स्टाफ नहीं है। यहां पर वेटिलेटर यूनिट संचालन के लिए डाक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ दोनों तैनात किये गये है,लेकिन आधे – अधूरे आ रहे उपकरणों के कारण यूनिट का संचालन करने में दिक्कत आ रही है।
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