लखनऊ। बदलते मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया के साथ तेज बुखार का कहर भी बना हुआ है। बड़ों से लेकर बच्चों तक में बुखार से सब बेहाल है। बच्चों में तेज बुखार के साथ दाने की शिकायत लगातार बढ़ रही है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के बाल रोग विभाग में लगातार इस बुखार से पीड़ित बच्चे लगातार भर्ती हो रहे है। विशेषज्ञ डाक्टरों का मानना है कि इस बुखार ने बच्चों को बेहाल कर रखा है, जब तक सभी जांच होती है तब तक बुखार ठीक होने लगता है। फिर भी इस प्रकार के बुखार में विशेषज्ञों डाक्टरों से परामर्श लेना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक तरह का बैक्टीरियल संक्रमण या स्पेक्टोकॉकल, स्कारलेड बुखार हो सकता है, लेकिन इस पर अभी गहनता से जांच करना होगा।
केजीएमयू के बाल रोग विभाग में राजधानी ही नहीं आस-पास व दूर दराज जनपदों से बच्चें भी इलाज कराने के लिए आते है। इन दिनों डेंगू व चिकनगुनिया से पीड़ित बच्चे लगातार इलाज कराने के लिए आ रहे है, इन सबके साथ तेज बुखार के साथ शरीर में दाने के साथ बच्चों की भर्ती भी हो रही है। लक्षणों के आधार पर डेंगू व चिक नगुनिया की जांच भी करायी जाती है। प्राथमिक जांच में दाने खसरा भी नहीं लगते है। खास बात यह होती है। जब तक यह बच्चें तेज बुखार से बेहाल होकर यहां पर भर्ती करा कर इलाज कराने के लिए आते है, तब तक दो तीन दिन से ज्यादा गुजर चुका होता है। इसके बाद उनकी जांचे शुरु होती है। इस बीच बुखार ठीक होने लगता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. सिद्धार्थ ने बताया कि इस तरह के लक्षणों वाले बच्चे आ रहे है। इन बच्चों में तेज बुखार के साथ लाल रंग के दाने भी शरीर पर होते है। आज क ल बुखार तीन चार से दिन में नहीं बल्कि एक सप्ताह का समय ले सकता है। उन्होंने बताया कि यह एक प्रकार का बैक्टिरियल संक्रमण भी हो सकता है। इस प्रकार का बुखार स्कारलेड या स्पेटोकॉकस भी हो सकता है। इस पर गहन जांच का विषय है। फिलहाल अभिभावकों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इस तरह के लक्षण मिलने पर विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श लेकर इलाज करें।
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