लखनऊ। प्रदेश का नोडल सेंटर बनाये जाने के बाद भी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में हेपेटाइटिस बी-सी से पीड़ित मरीजों से जांच के लिए शुल्क देना पड़ रहा है,जबकि नेशनल हेल्थ मिशन ने मरीजों के लिए यह जांच निशुल्क कर रखी है। केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि नोडल सेंटर के तहत गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग व माइक्रोबायोलॉजी विभाग को संयुक्त रूप से मरीजों का इलाज करना है, लेकिन अभी सिर्फ मरीजों को दवा भी निशुल्क दी जा रही है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग को प्रदेश का नोडल सेंटर बनाते हुए हेपेटाइटिस बी व सी के मरीजों का निशुल्क इलाज व जांच कराना था। इसके लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग को भी जोड़ा गया था। नेशनल हेल्थ मिशन योजना के तहत इस अभियान के तहत विभिन्न जनपदों के डाक्टरों व अन्य को प्रशिक्षित भी किया गया था। योजना के मुताबिक विभिन्न जनपदों से हेपेटाइटिस बी व सी के मरीजों को जांच के लिए केजीएमयू भेजा जाएगा। यहां पर जांच व दवा निशुल्क व्यवस्था की गयी थी। इसके करीब तीन माह पहले किये गये इस दावे में नेशनल हेल्थ मिशन को बजट मुहैया कराना था।
एनएचएम ने दवाओं के लिए तो बजट जारी कर दिया, लेकिन जांच कराने के लिए बजट नहीं जारी किया गया। इसका नतीजा यह निकला कि मरीज यहां पर निशुल्क इलाज के लिए पहुंचे तो उनकी जांच तो की जाती है, लेकिन माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच के लिए शुल्क देना पड़ रहा है। काफी समय बीतने बाद भी बजट न मिलने से मरीज अभी भी जांच के लिए शुल्क दे रहे हैं। अगर देखा जाए तो हेपेटाइटिस सी की एक महीने की दवा कीमत करीब 17 हजार रुपए हैं। जबकि एचसीवी आरएनए जांच का दो से चार हजार रुपये तक आती है। केजीएमयू अफसरों का कहना है कि एनएचएम से दवाएं भेज दी गई थी। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक, एनएचएम से अभी बजट न आने से जांच का शुल्क लिया जा रहा है। एनएचएम से बजट की मांग ली गयी है।
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