प्रदेश में जानलेवा होता वायु प्रदूषण से जीवनकाल में कम हो गए 8.6 वर्ष

0
1049

लखनऊ। प्रदेश में वायु की गंभीर स्थिति राज्य के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा औसतन 8.6 साल कम करती है | यह जीवन प्रत्याशा बढ़ सकती है यदि यहाँ के वायुमंडल में प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों एवं धूलकणों की सघनता 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बताए गए सुरक्षित मानक) के सापेक्ष हो | इन निष्कर्षों की घोषणा AQLI के मंच पर इसके हिन्दी संस्करण के विमोचन के दौरान की गई ताकि वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक उस पार्टीकुलेट पोल्यूशन पर अधिकाधिक नागरिकों और नीति निर्माताओं को जागरूक और सूचना सम्पन्न बना सके जो पूरी दुनिया में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है |

यह विश्लेषण शिकागो विश्वविद्यालय, अमेरिका की शोध संस्था “एनेर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट एट द यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो(EPIC)” द्वारा तैयार “वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक” (एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स-AQLI) में दर्शाया गया है | AQLI के अनुसार लखनऊ के लोग 9.5 प्रतिशत ज्यादा जी सकते थे यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को अपना लेते |

इस अवसर पर संसद गौरव गोगोई ने कहा- अव्वल दर्जे की रिसर्च यह संकेत करती है कि वायु प्रदूषण में कमी और जीवनकाल में वृद्धि के बीच स्पष्ट संबंध है | स्वच्छ वायु की मांग के लिए नागरिकों के बीच जागरूकता बहुत जरूरी है और AQLI का सही दिशा में कदम है | सांसद गौरव ने कहा- मैं 1981 के वायु अधिनियम में संशोधन के लिए संसद में एक निजी विधेयक प्रस्तावित कर रहा हूँ जो बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण पैदा हो रहे स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को रेखांकित करता है |

AQLI के विश्लेषण के अनुसार- साल 1998 में इस वायु गुणवत्ता मानक को पूरा करने से जीवन प्रत्याशा में 5 साल की बढ़ोत्तरी होती लेकिन राज्य में लखनऊ प्रदूषित जिलों की सूची में शीर्ष पर नहीं है | उत्तर प्रदेश के अन्य जिले और शहर के लोगों का भी जीवनकाल घट रहा है और वे बीमार जीवन जी रहे हैं | उदाहरण के लिए हापुड़ के लोगों के जीवांकाल में 11 साल की बढ़ोत्तरी होती अगर वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों का अनुपालन किया जाता | इस तरह बुलंदशहर, गाज़ियाबाद, गौतमबुद्धनगर, संभल और अलीगढ़ भी इस सूची में पीछे नहीं हैं, जहां के लोगों की जीवन प्रत्याशा में क्रमशः 11.1 वर्ष, 10.7 वर्ष, 10.5 वर्ष और 10.5 वर्ष कि बढ़ोत्तरी होती, अगर लोग स्वच्छ और सुरक्षित हवा में सांस लेते |

AQLI के अनुसार- वायु प्रदूषण पूरे भारत में एक बड़ी चुनौती है लेकिन उत्तरी भारत के गंगा के मैदानी इलाके जहां बिहार, उत्तर , प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आते है, में यह स्पष्ट रूप से दिखता है | वर्ष 1998 में गंगा के मैदानी इलाकों से बाहर के राज्यों में निवास कर रहे लोगों ने उत्तर भारत के लोगों के मुक़ाबले अपने जीवनकाल में करीब 1.2 वर्ष की कमी देखी होती, अगर वायु की गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप होती | अब यह आंकड़ा बढ़ कर 2.6 वर्ष हो चुका है और इसमें गिरावट आ रही है लेकिन गंगा के मैदानी इलाकों की वर्तमान स्थिति के मुक़ाबले यह थोड़ी ठीकठाक है |

AQLI के अनुसार-भारत के उत्तरी क्षेत्र यानि गंगा के मैदानी इलाके में रह रहे लोगों की जीवन प्रत्याशा करीब 7 वर्ष कम होने की आशंका है, क्योंकि इन इलाकों के वायुमंडल में क्योंकि इन इलाकों के वायुमंडल में प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों और धूलकणों से होने वाला प्रदूषण यानि पार्टीकुलेट पोल्यूशन विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय दिशानिर्देशों को हासिल करने में विफल रहा है |

इस अवसर पर शिकगी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (EPIC) के निदेशक डा.माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा-AQLI के हिन्दी संस्करण की शुरुआत के साथ करोड़ों भारतीय यह जानने में समर्थ हो पाएंगे कि कैसे पर्टिकुलेट पोल्यूशन उनके जीवन को प्रभावित कर रहा है साथ ई कैसे वायु प्रदूषण से संबन्धित नीतियाँ जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में व्यापक बदलाव पैदा कर सकती हैं | डा.माइकल ने कहा अगर भारत अपने “राष्ट्रीय स्वच्छ वाई कार्यक्रम” के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल और वायु प्रदूषण में करीब 25 की कमी को बरकरार रखने में कामयाब रहा तो AQLI यह दर्शाता है कि वायु गुनवाता में इस सुधार से आम भारतीयों की जीवन प्रत्याशा औसतन 1.3 वर्ष बढ़ जाएगी , वहीं उत्तरी भारत के गंगा के मैदानी इलाकों में निवक कर रहे लोगों को अपने जीवनकाल में करीब 2 वर्ष के समय का फायदा होगा |

अब PayTM के जरिए भी द एम्पल न्यूज़ की मदद कर सकते हैं. मोबाइल नंबर 9140014727 पर पेटीएम करें.
द एम्पल न्यूज़ डॉट कॉम को छोटी-सी सहयोग राशि देकर इसके संचालन में मदद करें: Rs 200 > Rs 500 > Rs 1000 > Rs 2000 > Rs 5000 > Rs 10000.

Previous articleस्वामी चिन्मयानंद पहुंचे आंख की जांच कराने केजीएमयू
Next articleलखनऊ के नए DM ने संभाला पद

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here