लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के क्वीन मेरी अस्पताल में प्राइवेट कमरों के रखरखाव में हो रहे घोटाले का पर्दाफाश हो गया है। बताया जाता है कि प्राईवेट कमरों के रखरखाव के नाम पर ठेकेदार मरीज से लिये गये किराये मे से साठ प्रतिशत तो ले रहा है , लेकिन कमरों की हालत बदहाल बनी हुई है। शिकायतों के आधार कि ये गये निरीक्षण में खामियां मिलने पर केजीएमयू प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
क्वीन मेरी में महिला मरीजों की भर्ती के लिए 19 प्राईवेट कमरे है। इनमें डीलक्स, सेमी प्राइवेट, प्राइवेट श्रेणी के कमरे है। इन कमरों में मरीजों को श्रेणी के अनुसार किराया तय होता है आैर सुविधाएं दी जाती है। प्राइवेट कमरे में टीवी, फ्रिज, एसी, टायलेट व खाना बनाने के लिए छोटा सा किचन भी अलग होता है। केजीएमयू प्रशासन के नियमानुसार कमरों का संचालन करने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है कि कमरों के रखरखाव बेहतर तरीके से करें। मरीज के कमरा खाली होने के बाद पूरे कमरे की साफ सफ ाई कराना होता है। इसके अलावा किसी सामान की गड़बड़ी व अन्य शिकायत मिलने पर उसका निराकरण करना होता है।
इसके लिए केजीएमयू प्रशासन लिये गये कि राये में साठ प्रतिशत ठेकेदार को व चालीस प्रतिशत अपने पास रखता है। रखरखाव का काम कराने के लिए मैन पावर भी ठेकेदार की होती है। कुछ दिन पहले प्राईवेट कमरे की बदहाली की शिकायत केजीएमयू प्रशासन को एक मरीज के तीमारदार ने की थी। केजीएमयू प्रशासन ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्राइवेट कमरों का निरीक्षण किया था। मौके पर प्राइवेट कमरों की हालत बदहाल मिली थी। बताया जाता है कि प्राइवेट कमरों की बदहाल की जिम्मेदार क्वीन मेरी अस्पताल प्रशासन ही है। ठेकेदार पुराने कुछ डाक्टरों का खास होने के कारण वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारियों की नहीं सुनता है। केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसएन शंखवार व चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय कुमार के साथ क्वीन मेरी के कमरों का निरीक्षण किया था। खामियां मिलने पर विभाग प्रमुख व अन्य अधिकारियों को तलब भी किया था।
बताया जाता है कि पिछले कई वर्षो से कमरों के रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही थी। शिकायतों के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं होती थी आैर किराया पूरा देना पड़ता था। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. शंखवार व चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि कमरों के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। पुताई से लेकर अन्य खामियों को वह ही ठीक कराता है। अगर कोई बड़ी खामियां या दिक्कत आती है तो केजीएमयू प्रशासन उसको ठीक कराता है। केजीएमयू प्रशासन मिली खामियों को देखते हुए काफी गंभीर है।











