विश्व हेपेटाइटिस दिवस: हर 100 में से 2 गर्भवती महिलाएं हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित

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PGI, Kgmu व चिकित्सा संस्थानों के साथ संयुक्त रूप में हुए शोध में बड़ा खुलासा

लखनऊ। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर जहां एक ओर देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आए एक शोध ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। केजीएमयू (KGMU), एसजीपीजीआई (SGPGI) और राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) के संयुक्त अध्ययन में सामने आया है कि उत्तर भारत में प्रति 100 गर्भवती महिलाओं में से लगभग 2 महिलाएं हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis-B) से संक्रमित हैं।

2,005 महिलाओं की स्क्रीनिंग: शोध के मुख्य बिंदु
लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में प्रसवपूर्व जांच (ANC) के लिए पहुंची 2,005 गर्भवती महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया। आंकड़ों के अनुसार:
हेपेटाइटिस-बी (HBV): 37 महिलाएं संक्रमित पाई गईं। इसकी संक्रमण दर 1.85% दर्ज की गई (यानी हर 100 में से लगभग 2 महिलाएं)।
हेपेटाइटिस-सी (HCV): 6 महिलाएं संक्रमित मिलीं, जिसकी संक्रमण दर 0.31% रही।

नवजात को बचाने के लिए ’24 घंटे’ हैं सबसे बेहद अहम
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि गर्भावस्था के दौरान ही महिला में संक्रमण की पहचान कर ली जाए, तो नवजात शिशु को गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सकता है।
बचाव का तरीका:
बच्चे के जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी की पहली वैक्सीन (Birth Dose) और आवश्यकता पड़ने पर हेपेटाइटिस-बी इम्युनोग्लोब्युलिन (HBIG) देने से मां से बच्चे में होने वाले संक्रमण के खतरे को लगभग न के बराबर किया जा सकता है।

साइलेंट किलर है हेपेटाइटिस: विशेषज्ञों की राय
SGPGI के हेपेटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमित गोयल ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी और सी शरीर में लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के बने रह सकते हैं, इसलिए नियमित जांच ही एकमात्र सुरक्षा कवच है।

हेपेटाइटिस-बी: रोकथाम के लिए प्रभावी और सुरक्षित टीका उपलब्ध है।
हेपेटाइटिस-सी: शुरुआती चरण में पहचान होने पर पूरी तरह से इलाज संभव है।
13 दिग्गज विशेषज्ञों ने मिलकर किया यह शोध
यह शोध अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित है, जिसका शीर्षक “Ciro prevalence and Determinants of Hepatitis-B Virus and Hepatitis-C Virus Infection Among Pregnant Women in North India” है।

प्रमुख शोधकर्ता:
डॉ. अभिषेक यादव, डॉ. मोनिका अग्रवाल, डॉ. विकासेंदु अग्रवाल, प्रो. अमिता जैन, प्रो. सुमित रुंगटा, प्रो. प्रभाकर मिश्रा और प्रो. अमित गोयल सहित 13 विशेषज्ञ इस अध्ययन में शामिल रहे।

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