लखनऊ। सनातन धर्म में अग्रपूज्य और विघ्नहर्ता भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व ‘गणेश चतुर्थी’ इस साल 14 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्न काल में गणपति का जन्म हुआ था। मान्यतानुसार, इन 10 दिनों में भगवान गणेश पृथ्वी लोक पर वास करते हैं और अपने भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर करते हैं।
गणेश पूजन एवं स्थापना का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल (स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ) के अनुसार, इस वर्ष चतुर्थी तिथि और पूजन के विशेष मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, प्रात: 07:06 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, प्रात: 07:06 बजे तक
मध्याह्न पूजा का उत्तम मुहूर्त: सुबह 10:48 बजे से दोपहर 01:16 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 28 मिनट)
बन रहे हैं दुर्लभ शुभ योग और नक्षत्र
इस बार गणेश चतुर्थी पर कई अत्यंत शुभ धार्मिक योग बन रहे हैं, जो पूजा-अर्चना के फल को कई गुना बढ़ा देंगे:
रवि योग: दोपहर 01:55 से अगले दिन (15 सितंबर) प्रात: 05:52 तक।
नक्षत्र: दोपहर 01:55 तक चित्रा नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद स्वाति नक्षत्र प्रारंभ होगा।
योग: दोपहर 12:47 तक ब्रह्म योग रहेगा, तत्पश्चात इंद्र योग की शुरुआत होगी।
कैसे करें पूजन और क्या लगाएं भोग?
गणेश जी बुद्धि, रिद्धि और सिद्धि के दाता हैं। उनका वाहन मूषक है।
पूजन विधि: स्थापना के समय गणेश प्रतिमा पर सिंदूर अर्पित करें।
प्रिय भोग: गणपति बाप्पा को मोदक और लड्डू अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए पूजन में इनका भोग अवश्य लगाएं।
धार्मिक मान्यता: सच्चे मन से 10 दिनों तक गणेश जी की उपासना करने से जीवन में तनाव खत्म होता है और सुख, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। महाराष्ट्र सहित देशभर में यह उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
भूलकर भी न करें चंद्र दर्शन: जानें पौराणिक मान्यता
चतुर्थी तिथि के दिन चंद्र दर्शन को वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को देखने पर व्यक्ति पर मिथ्या (झूठा) कलंक लगने का भय रहता है।
विशेष उपाय: यदि भूलवश कोई इस दिन चंद्र दर्शन कर ले, तो दोष निवारण के लिए श्रीमद्भागवत के 10वें स्कंध के 56-57वें अध्याय में वर्णित ‘स्यमंतक मणि की कथा’ का श्रवण या पाठ अवश्य करें।












