PGI में यूपी की पहली NGS लैब शुरू, 3 दिनों में तैयार होगी ड्रग रेजिस्टेंस रिपोर्ट

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​लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग स्थित बीएसएल-3 टीबी लैब में 10 से 12 सितंबर, 2026 तक तीन दिवसीय ‘नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग’ (NGS) पर पहली हैंड्स-ऑन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय “सीक्वेंस से समाधान तक: सटीक टीबी निदान के लिए एनजीएस” रखा गया था।

​उत्तर प्रदेश की पहली हाई-टेक एनजीएस सुविधा
​एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन के मार्गदर्शन और प्रो. ऋचा मिश्रा के प्रस्ताव पर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने अपने सीएसआर (CSR) फंड से अत्याधुनिक एनजीएस प्लेटफॉर्म ‘इलुमिना एमआईसेक आई100प्लस’ संस्थान को उपलब्ध कराया है। एसजीपीजीआई में शुरू हुई यह एनजीएस सुविधा पूरे उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी लैब है, जो देश से टीबी उन्मूलन के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।

​हफ्तों का इंतजार अब दिनों में होगा खत्म
​इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही अनुक्रमण प्रक्रिया (Sequencing Process) के जरिए मरीज में टीबी के पैथोजन (रोगजनक) की पहचान के साथ-साथ कई दवाओं के प्रति प्रतिरोध (Multi-Drug Resistance) पैदा करने वाले उत्परिवर्तनों (Mutations) का सटीक पता लगाया जा सकता है। इससे टीबी जांच रिपोर्ट के लिए हफ्तों तक चलने वाला इंतजार अब महज कुछ दिनों में बदल जाएगा, जिससे मरीजों का इलाज तुरंत शुरू हो सकेगा।

​देशभर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
​इस कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों, डायग्नोस्टिक लैब और शोध संस्थानों से आए 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को लैब में निम्नलिखित प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव कराया गया:
​लाइब्रेरी तैयारी: इलुमिना डीएनए प्रेप और डीपलेक्स वर्कफ़्लो का उपयोग करके टारगेट एनरिचमेंट और लाइब्रेरी तैयार करना।
​क्वालिटी कंट्रोल: पीसीआर क्लीन-अप, लाइब्रेरी क्वांटिफिकेशन और पूलिंग।

​रन सेट-अप एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स: एमआईसेक आई100प्लस मशीन पर रन सेट-अप के साथ एनजीएस डेटा का बायोइन्फॉर्मेटिक्स विश्लेषण।
​इसके जरिए विशेषज्ञों ने अपने-अपने संस्थानों में एनजीएस लैब स्थापित करने और टीबी निदान में इसे लागू करने के गुर सीखे।
​विशेषज्ञों की उपस्थिति और तकनीकी सहयोग
​कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. आर.के. धीमन ने किया। कार्यक्रम का संयोजन माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर व बीएसएल-3 लैब की नोडल अधिकारी डॉ. ऋचा मिश्रा और उनकी टीम—डॉ. विक्रमजीत सिंह, डॉ. अक्षय कुमार आर्य, डॉ. आशिमा जमवाल, डॉ. सना इस्लाही और डॉ. रोम्या सिंह द्वारा किया गया।

​कार्यशाला में डॉ. संजय भट्टाचार्य (टाटा मेडिकल सेंटर, कोलकाता), डॉ. प्रभाकर यादव (CBMR, लखनऊ), डॉ. अभिषेक डे (NIPER, रायबरेली) और डॉ. शिशिर कुमार गुप्ता (CBMR, लखनऊ) ने टीबी और आरएनए सीक्वेंसिंग पर व्याख्यान दिए। वेट-लैब सत्रों में इलुमिना और प्रेमास लाइफ साइंसेज ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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