23 जुलाई तक तंत्र-मंत्र और विशेष साधना का महासंयोग
लखनऊ। वर्ष में आने वाली चार प्रमुख नवरात्रियों में से एक, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत आज यानी 15 जुलाई से हो रही है, जो 23 जुलाई तक चलेगी। सामान्य नवरात्रियों (चैत्र और शारदीय) की तुलना में गुप्त नवरात्रि को तंत्र-मंत्र, कठिन साधना और आध्यात्मिक सिद्धियों के लिए बेहद विशेष माना जाता है।

लखनऊ के अलीगंज स्थित ‘स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र’ के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार, यह समय देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए सर्वोत्तम है। इन नौ दिनों में की गई विशेष साधना से जातक को नकारात्मक ऊर्जाओं, गंभीर ग्रह दोषों और नजर दोष से मुक्ति मिलती है।
गुप्त नवरात्रि में होती है ‘दस महाविद्या’ की साधना
आम तौर पर नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, लेकिन गुप्त नवरात्र के दौरान साधक और तांत्रिक अपनी गुप्त सिद्धियों के लिए दस महाविद्याओं की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
इस दौरान निम्नलिखित देवियों की आराधना का विधान है:
मां काली और तारा देवी
त्रिपुर सुंदरी और भुवनेश्वरी
माता छिन्नमस्ता और त्रिपुरा भैरवी
मां धूमावती और माता बगलामुखी
मातंगी और कमला देवी
ज्योतिषीय महत्व:
साल में दो गुप्त और दो प्रत्यक्ष (प्रकट) नवरात्र आते हैं। गुप्त नवरात्रि में पूजा और साधना को जितना गोपनीय (गुप्त) रखा जाता है, उसका फल उतना ही अधिक और प्रभावशाली मिलता है। पारिवारिक सुख-शांति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए भी यह नौ दिन बेहद शुभ माने जाते हैं।












