पीजीआई अध्ययन में खुलासा : 80% किडनी मरीज हाई ब्लड प्रेशर के शिकार
लखनऊ। Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences के नेफ्रोलॉजी विभाग में हुए अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभाग की ओपीडी में डेढ़ महीने के दौरान स्क्रीनिंग किए गए करीब छह हजार गुर्दा रोगियों में से लगभग 4800 मरीज हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की थी जिन्हें पहले अपने बढ़े हुए ब्लड प्रेशर की जानकारी तक नहीं थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर रहने से दिल की धमनियां कमजोर होने लगती हैं। इसका असर धीरे-धीरे किडनी, हृदय और मस्तिष्क पर पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
‘साइलेंट किलर’ साबित हो रहा हाई बीपी
पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष Dr. Narayan Prasad ने बताया कि हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामने नहीं आते। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिल तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। उन्होंने बताया कि किडनी रोग, थायराइड और हार्मोनल गड़बड़ियां हाई ब्लड प्रेशर बढ़ाने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 350 किडनी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
ये हैं हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारण
किडनी की बीमारी, थायराइड और हार्मोनल डिसऑर्डर, मोटापा ,गर्भावस्था, बिना डॉक्टर की सलाह दवाओं का सेवन
कैसे करें बचाव
प्रतिदिन पांच ग्राम से अधिक नमक का सेवन न करें, नियमित योग और व्यायाम करें, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और वजन नियंत्रित रखें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें












