PGI:नेफ्रोलॉजी विभाग का 39वाँ स्थापना दिवस: अंगदान से जीवन बचाने का संकल्प

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लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान  के नेफ्रोलॉजी विभाग ने शनिवार को एच.जी. खुराना ऑडिटोरियम में अपना 39वाँ स्थापना दिवस अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाया। इस अवसर पर “उत्तर प्रदेश में मृत अंगदाता प्रत्यारोपण (Deceased Donor Transplantation) मॉडल का विस्तार” विषय पर एक विशेष सीएमई (CME) का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के ख्यात विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

 

 

 

 

 

 

उपमुख्यमंत्री ने अंगदाता परिवारों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के  डिप्टी सीएम बजेश पाठक   थे। उन्होंने समाज में अंगदान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एक व्यक्ति मृत्यु के पश्चात भी अंगदान के जरिए कई लोगों के जीवन में जीवित रह सकता है। इस भावुक क्षण में उन्होंने लखनऊ की स्वर्गीय श्रीमती लक्ष्मी और मध्य प्रदेश के एक अन्य मृत अंगदाता के परिजनों को सम्मानित किया, जिन्होंने दुख की घड़ी में भी अंगदान का साहसी निर्णय लिया।

 

 

 

 

 

प्रदेश में अंगदान की अपार संभावनाएँ

संस्थान के निदेशक डॉ. आर.के. धीमन ने सफल प्रत्यारोपण के लिए टीम वर्क और जन-जागरूकता को अनिवार्य बताया। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद ने आँकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में से यदि केवल 1% मामलों में भी मृत अंगदान (Cadaver Donation) सुनिश्चित हो सके, तो हर साल लगभग 480 किडनी और सैकड़ों लिवर व हृदय प्रत्यारोपण किए जा सकते हैं। उन्होंने गुजरात और तमिलनाडु के सफल मॉडल्स का उदाहरण देते हुए इसे यूपी में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

विशेषज्ञों का साझा अनुभव और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

समारोह में ‘नोटो’ (NOTTO) के निदेशक प्रो. अनिल कुमार और तमिलनाडु ट्रांसप्लांट अथॉरिटी के डॉ. नटराजन गोपालकृष्णन जैसे दिग्गजों ने अंगदान कार्यक्रम को सशक्त बनाने की रणनीतियाँ साझा कीं। विभाग के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विजय खेर को नेफ्रोलॉजी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा गया।

उत्कृष्ट सेवा के लिए पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम के दौरान विभाग के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियनों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और अनुसंधान के लिए पुरस्कृत किया गया। डॉ. अनुपमा कौल ने बढ़ती बीमारियों को देखते हुए बचाव और रोकथाम पर जोर दिया। अंत में आयोजन सचिव डॉ. मानस रंजन पटेल और डॉ. संतोष कुमार वी ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह स्थापना दिवस केवल उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को अंगदान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के संकल्प का प्रतीक रहा।

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