लखनऊ । हीमोफिलिया के मरीजों को प्रदेश के 26 सेंटर पर इलाज मिलेगा। इसके लिए इसके तहत हीमोफिलिया के मरीजों की देखभाल प्रदान करने के लिए रीयल-टाइम वेब-आधारित, वेबसाइट का शुभारंभ कि या गया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित किया गया है।
शुक्रवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक हीमोफिलिया की दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन कर रहे थे। पीजीआई के टेलीमेडिसन के आडीटोरियम में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि हीमोफिलिया पर संस्थान बहुत अच्छा कार्य कर रहा है।
कार्यशाला में एचओडी हेमेटोलॉजी आैर राज्य नोडल अधिकारी प्रो. राजेश कश्यप ने कहा कि हीमोफिलिया एक दुर्लभ विरासत में मिला रक्तस्त्राव विकार है। पुरुष इस रोग से प्रभावित होते हैं। प्रभावित व्यक्तियों में रक्त का थक्का नहीं जमता है, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ों में अत्यधिक रक्तस्राव होता है और बाद में चोट लगती है। यह अत्यधिक रक्तस्त्राव कई मरीजों के लिए घातक हो सकता है। इसका एकमात्र इलाज एंटी-हीमोफीलिया फैक्टर (एएचएफ) देना है। यह दवाई भारत में निर्मित नहीं है यह आयात की जाती है और महंगी है। अधिकांश रोगी ए एच एफ का खर्च वहन नहीं कर सकते।
2009 में प्रदेश सरकार ने इन रोगियों को मुफ्त एएचएफ प्रदान करने के लिए धन स्वीकृत किया। यह राज्य में हीमोफिलिया केयर प्रोग्राम की शुरुआत थी। वर्ष 2017 में भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत धन प्राप्त करके कार्यक्रम को और बढ़ावा मिला। हीमोफिलिया उपचार केंद्रों की संख्या प्रारंभिक 08 केंद्रों से बढ़ाकर 26 एचटीसी की गई।
हेमोफिलिया देखभाल में वर्तमान ज्ञान और प्रगति प्रदान करने के लिए हेमेटोलॉजी विभाग जो हीमोफिलिया देखभाल के लिए राज्य नोडल केंद्र है।












