लखनऊ। डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मरीजों के ऑन लाइन जमा किए शुल्क में लाखों रुपये का घोटाला आैर ज्यादा का हो सकता है। जांच कमेटी एक महीने बाद भी घोटाला कितने हुआ है अभी तक इसका अंदाजा तक नहीं लगा पा रही है। जांच कमेटी ने गहन जांच के लिए और कुछ वक्त आैर मांगा है। बताया जाता है कि लाखों रुपये के इस घोटाले को लोहिया संस्थान का ही एक गुट जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। संस्थान के ही सूत्रों की माने तो लाखों का घोटाला करोड़ों में पहुंचने उम्मीद की जा रही है, इसमें कई जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
लोहिया संस्थान की ओपीडी में तीन से चार हजार मरीज डाक्टरों से परामर्श के लिए पहुंचते है। वहीं लगभग एक हजार बिस्तरों पर भर्ती के लिए भी मारा मारी रहती हैं। भर्ती प्रक्रिया से लेकर अन्य मदों का शुल्क जमा करने के लिए हॉस्पिटल इनफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएस) साफ्टवेयर व्यवस्था लागू है। ओपीडी , भर्ती व अन्य मदों में शुल्क नगद व ऑनलाइन फीस (कार्ड के माध्यम से) जमा कर किया जाता है। इसमें लिया जा रहा कैश फीस तो संस्थान के बैंक खाते में लगातार जमा हो रही है। जबकि ऑनलाइन फीस में जमा करने में लाखों रुपये की गड़बड़ी मिली थी। आरोप हैं कि ऑनलाइन शुल्क लिया तो गया, लेकिन यह शुल्क संस्थान के बैंक खाते तक नहीं पहुंचा है। खुलासे के बाद संस्थान प्रशासन ने घोटाले के लिए जांच के लिए कमेटी का गठन किया।
आनन-फानन में चार संविदा कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया, जबकि मरीजों द्वारा जमा शुल्क का लेखा-जोखा रखने के लिए संस्थान में वित्त विभाग करता है। इस व्यवस्था को चाक चौंबद करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों की पूरी की पूरी टीम तैनात है, जो कि वित्तीय व्यवस्था का लगातार आडिट व अन्य कार्यो की समीक्षा करती रहती है। इसके बावजूद इतनी बड़ी गड़बड़ी अभी तक पकड़ में ही नहीं आयी, लोगों को आश्चर्य लग रहा है। कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की गणित ने घोटाले को पकड़ा। परन्तु जांच धीमे गति से चल रही है। संस्थान द्वारा कमेटी का गठन हुए एक महीने से ज्यादा समय गुजर चुका है, लेकिन बताया जाता है कि अभी तक घोटाले की रकम कितनी है, इसका ही अभी ठोस पता नहीं चल सका। हैरान परेशान कमेटी ने जांच के लिए और वक्त मांगा है। अगर सूत्रों की माने तो संस्थान के ही एक जिम्मेदार अधिकारियों का एक गुट जांच में सहयोग ही नहीं कर रहा है। जांच टीम कुछ बड़ा खुलासा करने बच रही है। हालांकि संस्थान के अधिकारियों का दावा है कि घोटाले बाजों पर कड़ी कार्रवाई होगी।












