लोहिया संस्थान में गर्भस्थ शिशुओं हो सकेगी यह सटीक जांच

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लखनऊ। डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एक आैर अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा मरीजों को मिलेगी। नयी अत्याधुनिक चिकित्सा के तहत अब गर्भस्थ शिशु की जटिल गंभीर बीमारियों का शुरू में ही पता किया जा सकेगा। इस नयी अत्याधुनिक जांच सुविधा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में शुरू कर दी गयी है।

लोहिया संस्थान के शहीद पथ स्थित मातृ शिशु रेफरल हॉस्पिटल में अभी तक यहां गर्भस्थ के अंगों के विकास की जानकारी के लिए टीफा टेस्ट किया जाता था, जबकि लोहिया संस्थान के मुख्य परिसर के रेडियोलॉजी विभाग में टीफा जांच हो रही थी, लेकिन अब मातृ शिशु रेफरल हॉस्पिटल में ही टीफा जांच उपलब्ध कर दिया है।

वरिष्ठ डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया कि यह एक विशेष प्रकार का अल्ट्रासाउंड टेस्ट होता है। इसमें गर्भ में पल रहे शिशु के सभी अंगों में कितना विकास हो रहा है। इसका सटीक पता लगाया जा सकता है। यदि शिशु में किसी भी प्रकार की शारीरिक दिक्कत है आैर इलाज से ठीक नहीं हो सकता है, तो डॉक्टर के परामर्श पर गर्भपात भी कराया जा सकता है।
विभाग प्रमुख डॉ. स्मृति अग्रवाल का कहना है कि अल्ट्रासाउंड गाइडेड टेस्ट से जेनेटिक डिजीज का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पेट में गर्भस्थ पानी में तैरता में रहता है। इस अल्ट्रासाउंड गाइडेड टेस्ट में एक सूई से पानी का नमूना लेते हैं। इस नमूने से गुणसूत्र व मॉलीक्यूलर जांच हो जाती है। इससे अनुवांशिक बीमारी का पता लग जाता हैं। इसके साथ ही डाउन सिंड्रोम का भी पता लगा सकते है। इस बीमारी में शिशु का शारीरिक व मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है। ऐसे में गर्भ में बीमारी का पता लगाकर डाउन सिड्रोम पीड़ित शिशु को हटा भी सकते हैं। गर्भावस्था में 16 से 20 हफ्ते के बीच यह जांच हो सकती है।
उन्होंने बताया कि यदि गर्भस्थ शिशु में अल्ट्रासाउंड के दौरान कोई विकृति पाई गयी है। उन्होंने बताया कि फैमिली में अगर कोई अन्य अनुवांशिक बीमारी जैसे की थैलसीमिया, हिमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी व परिवार में किसी बच्चे में जन्मजात विकृति पायी गयी है, या फिर पति-पत्नी में से एक या दोनों किसी अनुवांशिक बीमारी से ग्रसित है। तो उन्हें सावधान रहने की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ये सभी जांचें करा लेनी चाहिए।

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