लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद निर्णंय लगातार बदलते जा रहे है। यहां के डाक्टर न्याय के लिए न्यायालय की शरण में जाते है आैर उनके निर्णय लगातार पलट जा रहे है। अब फार्माकोलॉजी विभाग के डाक्टर पर लिये गये निर्णय को पलट दिया गया आैर केजीएमयू कुछ नहीं कर पाया। दरअसल डाक्टर राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय में पत्र भेज कर कार्य परिषद की मनमानी व बिना मानके चलने पर कार्रवाई करने की मांग समय से की जा रही है।
केजीएमयू के डाक्टर कार्यपरिषद द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए न्यायालय की शरण में चले जाते है। अब फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. संजय खत्री के मामले में भी केजीएमयू प्रशासन को चित हो गया है।
केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ठ की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक में डॉ. खत्री को निलंबित करने के साथ-साथ डिमोशन की सजा दी गई। डॉ. खत्री ने कार्यपरिषद के निर्णय को कोर्ट में फैसले को चुनौती दे दी। कोर्ट ने कार्यपरिषद के मनमाने फैसले को नकार दिया। ऐसे में बुधवार को डॉ. संजय खत्री को दोबारा बहाली के साथ-साथ पदोन्नति भी करनी पड़ी। केजीएमयू प्रशासन को असिस्टेंट प्रोफेसर से उन्हें फिर प्रोफेसर पद का आदेश जारी करना पड़ा। बताते चले कि इससे पहले कार्यपरिषद द्वारा निलंबित किए गए सीवीटीएस के हार्ट सर्जन डॉ. शेखर टंडन, पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आशीष वाखलू को भी कोर्ट के आदेश पर बहाल करना पड़ा था। वहीं एसपीएम विभाग के डॉ. मो. जमाल को भी कोर्ट के आदेश पर विभागाध्यक्ष बनाना पड़ा है। अब केजीएमयू के फैकल्टी सदस्यों के बीच लगातार पलट रहे निर्णयों आैर कार्यपरिषद की मनमानी की चर्चा होने लगी है।
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