हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के इलाज में जल्द जांच और उपचार तक पहुंच की अहम भूमिका

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लखनऊ – वर्ल्ड हीमोफीलिया दिवस (17 अप्रैल) के मौके पर चिकित्सकों और चिकित्सकीय देखभाल से जुड़े लोगों ने हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों को सामान्य जीवन जीने में मदद करने में जल्दी जांच, उपचार तक पहुंच और फिजियोथेरेपी की जरूरत पर बल दिया है। फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी तक आसान पहुंच और फिजियोथेरेपी के जरिये हीमोफीलिया के मरीज विशेषरूप से बच्चे खून से संबंधित इस जानलेवा बीमारी से लड़ सकते हैं। आधारभूत जानकारी की कमी और हीमोफीलिया का इलाज नहीं हो पाने के कारण जान जाने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। चिकित्सकों ने सरकारी केंद्रों पर जांच की सुविधा, फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और फिजियोथेरेपी तक पहुंच सुनिश्चित करने में सरकार के सहयोग पर भी जोर दिया है। हीमोफीलिया फेडरेशन (इंडिया) के मुताबिक, भारत में हीमोफीलिया के 20,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड मरीज हैं। हालांकि भारत की आबादी को देखते हुए अनुमान है कि यह संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है।

एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ में एसोसिएट प्रोफेसर हेमटोलॉजी, डॉ राजेश कश्यप के अनुसार, “विश्व हीमोफिलिया दिवस पर, मैं बच्चों को सामान्य और विकलांगता मुक्त करने के लिए प्रारंभिक निदान, उपचार की पहुंच और प्राथमिक रोग निरोधकों की दीक्षा पर फिर से जोर देना चाहता हूं। बचपन और जीवन। नियोजित और पर्यवेक्षित फिजियोथेरेपी यह सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि वे सक्रिय और स्वस्थ रहें। इस रक्तस्राव विकार, पुनर्वास, व्यावसायिक प्रशिक्षण के उपचार के लिए व्यापक हीमोफिला देखभाल सुविधा प्रदान करने के लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि प्रभावित आबादी सार्थक रोजगार हासिल कर सके और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सके। जबकि वर्तमान में फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी उपचार का मुख्य प्रवास है, भविष्य में जीन थेरेपी हीमोफिलिया (पीडब्लू) वाले व्यक्तियों के लिए आशा की दुर्लभ पेशकश करता है।

बच्चों में हीमोफीलिया

बच्चे हीमोफीलिया के निर्दोष शिकार होते हैं। रक्तस्राव शुरू हो जाने और जान जाने के खतरे के कारण बच्चे अपना जीवन सामान्य रूप से नहीं जी पाते हैं और जिंदगी को लेकर मरीज और उनके परिजनों पर बहुत भावनात्मक दबाव होता है। हीमोफीलिया जिंदगीभर चलने वाली चिकित्सकीय समस्या है और सही इलाज तक पहुंच नहीं होने से बच्चे आमतौर पर स्कूल नहीं जा पाते और हमेशा चोट को लेकर सतर्क रहना पड़ता है।

फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और बीमारी की जांच के लिए सरकारी केंद्र उपलब्ध हैं, लेकिन देश में इसको लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। उत्तर प्रदेश और गुजरात में कुछ केंद्र हैं, जहां प्रोफिलैक्सिस इलाज मिलता है, जो हीमोफीलिया का सर्वश्रेष्ठ इलाज है। दूसरी ओर, इस समय एक और अनिवार्य जरूरत है देशभर में सरकारी केंद्रों में फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी के विस्तार के लिए सरकार का समर्थन मिलना और प्रशिक्षित चिकित्सकों की उपलब्धता। यह महत्वपूर्ण है कि हीमोफीलिया के मरीजों के समर्थन में सरकार और हर भारतीय को आगे आना चाहिए। जरूरी फैक्टर रिप्लेसमेंट थरेपी और फिजियोथेरेपी तक आसान पहुंच होने से इसके मरीज काफी हद तक सामान्य और अर्थपूर्ण जीवन जी सकते हैं।

हीमोफीलिया क्या है?

हीमोफीलिया खून से जुड़ा एक आनुवांशिक जेनेटिक विकार है, जिसमें शरीर में खून का थक्का जमाने की क्षमता खत्म हो जाती है। इस दुर्लभ बीमारी के शिकार व्यक्ति में खून सामान्य लोगों की तुलना में तेजी से नहीं बहता है, लेकिन ज्यादा देर तक बहता रहता है। उनके खून में थक्का जमाने वाले कारक (क्लोटिंग फैक्टर) पर्याप्त नहीं होते हैं। क्लोटिंग फैक्टर खून में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो चोट लगने की स्थिति में खून को बहने से रोकता है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें ज्यादा खून बहने के कारण मरीज की जान भी जा सकती है। बीमारी के बारे में जागरूकता और सही प्रबंधन के जरिये इसके मरीजों तक पर्याप्त उपचार पहुंचाना और उनका जीवन बचाना संभव हो सकता है।

हीमोफीलिया प्रायः दो प्रकार का होता है, पहला हीमोफीलिया ए और दूसरा हीमोफीलिया बी। हीमोफीलिया का सबसे सामान्य प्रकार हीमोफीलिया ए है। इस बीमारी में मरीज के शरीर में क्लोटिंग फैक्टर-आठ पर्याप्त नहीं होता है। वहीं हीमोफीलिया बी के मरीज ज्यादा नहीं पाए जाते। इसके मरीजों में फैक्टर-नौ की पर्याप्त मात्रा नहीं होती है। हालांकि परिणाम दोनों ही स्थितियों में एक जैसा होता है और मरीज में चोट लगने की स्थिति में खून सामान्य से ज्यादा समय तक बहता रहता है।

लक्षण

हीमोफीलिया ए और बी के लक्षण समान होते हैं: बड़े खरोंच के निशान; कटने, दांत टूटने या सर्जरी के बाद सामान्य से ज्यादा समय तक खून बहना; बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक शरीर में कहीं रक्तस्राव होने लगना; मांसपेशियों और जोड़ों में रक्तस्राव। जोड़ों और मांसपेशियों में रक्तस्राव से जोड़ों में सूजन, दर्द और सख्ती आ जाती है और मरीज को जोड़ों या मांसपेशियों के प्रयोग में परेशानी होती है।

उपचार

वर्तमान समय में हीमोफीलिया के लिए उपलब्ध उपचार बहुत प्रभावी है। सुई के जरिये खून में वह क्लोटिंग फैक्टर पहुंचाया जाता है, जिसकी कमी है। खून बहने की जगह पर पर्याप्त क्लोटिंग फैक्टर के पहुंचते ही खून बहना बंद हो जाता है। रक्तस्राव का जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी इलाज करना चाहिए। जल्दी इलाज से दर्द कम करने और जोड़ों, मांसपेशियों और अंगों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। अगर रक्तस्राव का इलाज जल्द किया जाए जो इसे रोकने के लिए कम ब्लड प्रोडक्ट की जरूरत पड़ती है।

हीमोफीलिया का इलाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन प्रोफिलैक्सिस उपचार के जरिये मरीज सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो सकता है। प्रोफिलैक्सिस में अनिवार्य तौर परनियमित रूप से मरीज के शरीर में क्लोटिंग फैक्टर रिप्लेसमेंट किया जाता है, जिससे चोट या अन्य स्थिति में आसानी से खून का थक्का जम सके। यह उपचार रक्तस्राव रोकता है और जोड़ों को खराब होने से बचाता है, जिससे हीमोफीलिया से ग्रसित बच्चे अन्य कामों के साथ-साथ ज्यादा सक्रिय जीवन जी पाते हैं, स्कूल जा पाते हैं और बाहर जाकर खेल पाते हैं। उपचार की मदद से ऐसे बच्चे भी अन्य सामान्य बच्चों की तरह ही जीवन जीने में सक्षम हो पाते हैं।

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