लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लॉरी कार्डियालॉजी के डाक्टरों ने सीने में बिना चीरा लगाये वाल्व का प्रत्यारोपण कर दिया। ट्रांस कैथेटर आयोटिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (टावी) तकनीक से मरीज की सर्जरी की गयी। विशेषज्ञों ने मरीज को वाल्व भी निशुल्क लगाया है। सर्जरी के बाद मरीज पूर्णतया स्वस्थ्य है। विशेषज्ञों के अनुसार सीतापुर निवासी श्याम अवध (64) को काफी अर्से से सांस लेने में तकलीफ थी। इसके साथ उसे चक्कर भी आने लगा था। बीच में सीने में दर्द की समस्या हो जाती थी। स्थानीय डाक्टरों से इलाज के बाद को निदान न होने पर वह लॉरी कार्डियोलॉजी विभाग पहुंचा। यहां विभाग प्रमुख डॉ. वीएस नारायण के साथ डॉ.ऋषि सेट्ठी के निर्देशन में मरीज का इलाज शुरू किया। जांच कराया तो पता चला उसके हार्ट में वॉल्व सिकुड़ गया है। इस कारण ब्लड में आक्सीजन की सप्लाई शरीर में प्रभावित हो रही थी।
मरीज का वाल्व बदलने की आवश्यकता तत्काल बन रही थी। डॉ. ऋ षि ने बताया कि ऑक्सीजन युक्त शरीर को ब्लड आयोटिक वॉल्व के जरिए आपूर्ति होता है। उन्होंने बताया कि अभी तक सर्जरी में सीना काटकर वॉल्व प्रत्यारोपण किया जाता रहा है। दरअसल आयोटिक वॉल्व का आकार सामान्य से बड़ा होता है। इस लिए अगर सीना काटकर सर्जरी की जाती तो मरीज को एक सप्ताह से 10 दिन तक मरीज को भर्ती रखा जाता है। इस दौरान संक्रमण होने का खतरा ज्यादा हो जाता है। सभी स्थितियों को देखते हुए उन्होंने मरीज में बिना चीरा वॉल्व बदलने का निर्णय लिया। इसमें ट्रांस कैथेटर आयोटिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (टावी) तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि एक प्रोजेक्ट के तहत मरीज में 20 लाख रुपये का वॉल्व मुफ्त लगाया गया। सर्जरी में जांघ की रक्त वाहिका में कैथेटर के जरिए हार्ट तक वॉल्व को पहुंचाया गया। इस प्रक्रिया से पहले कैथेटर के जरिए हार्ट में प्राकृतिक वॉल्व को गुब्बारे से फुलाकर चौड़ा कर दिया गया। इसके बाद आर्टिफिशियल वॉल्व का प्रत्यारोपण कर दिया गया। उन्होंने बताया कि खास बात यह थी कि मरीज को दूसरे दिन ही डिस्चार्ज कर दिया गया। अब मरीज ठीक है आैर नियमित दिनचर्या में है।












