लखनऊ। सरकारी डाक्टरों अब अपना तबादला नहीं चाहते हैं। उनका आरोप है कि बार-बार स्थानान्तरण सत्र की अवधि बढाने से संवर्ग के चिकित्सको में रोष है और असमंजस है तथा संवर्ग अव्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है। इसको लेकर प्रौविंशियल मेडिकल सर्विसेज एसोशिएशन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि प्रान्तीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के इस वर्ष को स्थानान्तरण-शून्य सत्र घोषित किया जाए।
संघ के अध्यक्ष डा. अशोक यादव की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की बैठक में यह मांग करते हुए कहा गया कि आज तक संवर्ग की स्थानान्तरण सूची जारी न किये जाने के कारण वार्षिक स्थानान्तरण नीति के प्राविधानों का उल्लघन हुआ है। संवर्ग की स्थानान्तरण नीति 2017 के प्राविधानों के अनुसार स्थानान्तरण सूची जारी करने की अन्तिम तिथि 30 जून थी। प्राईमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक का शिक्षा सत्र 1 जुलाई से शुरू हो चुके है। डेंगू, स्वाइन फलू, मलेरिया, चिकनगुनिया तथा जापानी इन्सेफेलाइटिस जैसे बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि अब संवर्ग के चिकित्सकों का स्थानान्तरण से अव्यवस्थित हो जायेगी।
वार्षिक स्थानान्तरण नीति दोषपूर्ण है जो समग्र-तथ्यों पर आधारित नहीं है। पिछले कुछ वर्षो से चिकित्सा विभाग में महानिदेशालय की जानकारी के बिना स्वास्थ्य मिशन / यूपीएचएसएसपी जैसी एजेन्सियों के माध्यम से, सेवा-प्रदाता निजी कम्पनीयों के द्वारा चिकित्सकों की सरकारी अस्पतालों में भर्ती की जा रही है। ऐसे में चिकित्सकों की वार्षिक स्थानान्तरण नीति में बिना व्यापक संशोधन किये, संवर्ग के चिकित्सकों का स्थनान्तरण किया जाना, लोकहित के विरूद्ध होगा। संघ की अगले माह में राज्य-कार्यकारिणी की बैठक में सम्बन्धित सभी विषयों पर आगे की रणनीति पर निर्णायक फैसला किया जायेगा।












