मेडिकल कॉलेजों की समितियों में ‘मनोनयन’ नहीं ‘चुनाव’ से हो आरक्षित वर्ग का चयन: SC-ST मेडिकल टीचर्स एसो.

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​शासन से हस्तक्षेप की मांग: राष्ट्रपति, राज्यपाल और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजा पत्र।
​बड़ा आरोप: कई संस्थानों में मनमाने तरीके से चुने जा रहे हैं प्रतिनिधि, प्रभावित हो रहा है प्रतिनिधित्व।
​मुख्य मांग: UPSC, SPSC और कुलपति-निदेशक चयन समितियों में भी शामिल हों SC-ST और OBC सदस्य।

लखनऊ/नई दिल्ली। देश के मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आरक्षित वर्ग के सही प्रतिनिधित्व को लेकर एक बड़ी मांग उठी है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने प्रदेश की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने इस मामले में शासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
​एसोसिएशन ने इस संबंध में राष्ट्रपति, राज्यपाल और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को एक पत्र भेजा है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि विभिन्न संस्थानों में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों का ‘मनोनयन’ (Nomination) करने के बजाय ‘चुनाव’ (Election) के माध्यम से चयन किया जाना चाहिए।

​’मनमाने तरीके’ से चयन का आरोप
​एसोसिएशन के महासचिव डॉ. हरि राम ने वर्तमान व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए कहा:
​”कई संस्थानों में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों का चयन पूरी तरह से मनमाने तरीके से किया जा रहा है। इसका सीधा असर आरक्षित वर्ग के वास्तविक प्रतिनिधित्व पर पड़ रहा है और उनके अधिकारों की अनदेखी हो रही है।

​इन प्रमुख समितियों में ‘चुनाव’ कराने की मांग
​डॉ. हरि राम ने मांग की है कि संस्थानों के सुचारू संचालन और पारदर्शिता के लिए सभी प्रमुख समितियों में प्रतिनिधि शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके (चुनाव) से चुने जाएं। इन समितियों में शामिल हैं:
​फैकल्टी चयन समिति (Faculty Selection Committee)
​अनुशासन समिति (Disciplinary Committee)
​जांच समिति (Inquiry Committee)
​आयोगों और उच्च पदों की चयन समितियों पर भी उठे सवाल
​एसोसिएशन ने केवल मेडिकल कॉलेजों तक ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर पर भी बड़े बदलावों की वकालत की है। भेजे गए पत्र में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि:
​UPSC और SPSC में भागीदारी: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) की चयन समितियों में आरक्षित वर्ग के सदस्यों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

​शीर्ष पदों के चयन में हिस्सेदारी: विश्वविद्यालयों के कुलपति (VC), संस्थानों के निदेशक (Director) और मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य (Principal) की चयन समितियों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों को जगह दी जाए।
​आरक्षण नीति का पूरी तरह हो पालन
​एसोसिएशन ने अंत में जोर देते हुए कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण नीति (Reservation Policy) का पूरी तरह और कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि देश के आरक्षित वर्ग को हर स्तर पर उनका उचित और संवैधानिक प्रतिनिधित्व मिल सके।

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