बिना काम दिए हर महीने बांटे जा रहे लाखों रुपये
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में एक तरफ जहां टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी किल्लत का रोना रोया जाता है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अड़ंगेबाजी का एक हैरान करने वाला मामला उजागर हुआ है। केजीएमयू प्रशासन ने करीब दो महीने पहले नियमित पदों पर 80 नए कर्मचारियों को जॉइनिंग तो करा ली, लेकिन अब तक उन्हें विभागों में तैनात नहीं किया गया है।
बताते हैं कि नए कर्मचारी पिछले दो महीनों से हर दिन काम करने की आस में विश्वविद्यालय पहुंचते हैं। सुबह 9 बजे उन्हें कलाम सेंटर बुलाया जाता है, जहां वे पूरा दिन बिना किसी काम के बैठने को मजबूर होते हैं और शाम 5 बजे घर लौट जाते हैं। काम करने के लिए तैयार होने के बावजूद प्रशासनिक आदेश न मिलने के कारण वे सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज करा पा रहे हैं।
सरकारी खजाने पर चपत, पुरानी टीम पर बढ़ा दबाव
इन 80 कर्मचारियों को बिना कोई काम लिए हर महीने लाखों रुपये का वेतन भुगतान किया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का सीधा नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, अस्पतालों में स्टाफ की कमी बनी हुई है।
मरीजों पर असर: 4,000 बेड और रोजाना 7 से 8 हजार मरीजों की ओपीडी वाले इस संस्थान में पुरानी टीम पर काम का अत्यधिक दबाव है।
सेवाएं प्रभावित: जिन विभागों में टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण इलाज और जांच में देरी हो रही है, वहां नए कर्मचारियों की सेवाएं नहीं ली जा पा रही हैं।
अधिकारियों की खींचतान में फंसी तैनाती
सूत्रों के मुताबिक केजीएमयू अफसरों के बीच जारी खींचतान के चलते इन कर्मचारियों की विभागवार तैनाती का आदेश अटका हुआ है। जिस नई भर्ती का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और मजबूत बनाना था, वह अब प्रशासनिक ढिलाई का शिकार बन चुकी है।
प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि कुछ प्रशासनिक कारणों की वजह से नवनियुक्त कर्मचारियों की तैनाती का आदेश रुका हुआ था। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी कर्मचारियों को उनके संबंधित विभागों में जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।












