लखनऊ। स्वास्थ्य महानिदेशालय में नर्सिंग संवर्ग के स्थानांतरण को लेकर नई बहस छिड़ गई है। नर्सिंग कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों ने स्थानांतरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं तथा दोहरे मानदंड अपनाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने आरोप लगाया है कि शासन और प्रशासन की ओर से लंबे समय से यह कहा जाता रहा है कि नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों का उनके गृह जनपद में स्थानांतरण नहीं किया जा सकता और इस संबंध में कोई स्पष्ट शासनादेश भी जारी नहीं हुआ है। इसके बावजूद नर्सिंग अनुभाग द्वारा 10 से अधिक नर्सिंग अधिकारियों का स्थानांतरण उनके गृह जनपदों में कर दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारी अभी भी ऐसे किसी आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले एक-दो वर्षों में पदोन्नति प्राप्त कई वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों (सीनियर नर्सिंग ऑफिसर) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में तैनात किया गया है, जबकि वहां वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों के पद स्वीकृत ही नहीं हैं। उनका कहना है कि ऐसे अधिकारियों का समायोजन जिला अस्पतालों में किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
संघ ने यह भी मुद्दा उठाया है कि निदेशालय स्तर के चार महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। इन पदों पर अब तक पदोन्नति न होने से नर्सिंग संवर्ग में असंतोष बढ़ रहा है और कर्मचारियों के बीच निराशा का माहौल है।
इन सभी मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया गया है। पत्र में मांग की गई है कि जिन नर्सिंग अधिकारियों का स्थानांतरण गृह जनपद में किया गया है, उनके आदेशों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किया जाए। यदि गृह जनपद स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जानी है तो इसके लिए सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होने वाला स्पष्ट शासनादेश जारी किया जाए।
संघ का कहना है कि स्थानांतरण नीति में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही, नियमों के विपरीत किए गए स्थानांतरणों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।











