अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता: 8 बेड का स्पेशल लावारिस वार्ड होने के बावजूद मरीज को बाहर निकाला।
महानिदेशक का कड़ा रुख: स्वास्थ्य महानिदेशक बोले— ‘जांच के बाद दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई’।
लखनऊ। राजधानी के 300 बेड की क्षमता वाले प्रतिष्ठित लोकबंधु अस्पताल से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक बार फिर लावारिस मरीजों के प्रति अस्पताल प्रशासन की घोर संवेदनहीनता उजागर हुई है।
अस्पताल के स्टाफ ने एक बुजुर्ग लावारिस महिला को प्राथमिक इलाज देने के बाद अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। शुक्रवार दोपहर को यह बेबस महिला इमरजेंसी के पास बने बरामदे में भीषण दर्द से तड़पती हुई पाई गई।
तीमारदारों ने खोला पोल, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
बरामदे में बुजुर्ग महिला को दर्द से कराहते देख अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के तीमारदारों को तरस आ गया। जब लोगों ने महिला से पूछताछ की, तो उसने रोते हुए बताया कि पहले उसे भर्ती कर इलाज दिया गया था, लेकिन बाद में डॉक्टरों और स्टाफ ने उसे जबरन बाहर निकाल दिया।
वहाँ मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
सवालों के घेरे में ‘लावारिस वार्ड’ की व्यवस्था
बड़ा सवाल: जब अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए महिला-पुरुष मिलाकर कुल 8 बेड का विशेष वार्ड आरक्षित है, तो फिर इस बुजुर्ग महिला को बेड से उतारकर बरामदे में तड़पने के लिए क्यों छोड़ दिया गया?
यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि कागजों पर चलने वाली व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी खोखली और संवेदनहीन हैं।
जांच के आदेश, दोषियों पर गिरेगी गाज
मामला तूल पकड़ते ही उच्च अधिकारी भी एक्शन मोड में आ गए हैं। इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
”मामले की पूरी गंभीरता से जांच कराई जा रही है।”
”अस्पताल में मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
”यदि लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।












